रायपुर, 06 अक्टूबर 2026

संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होने से नागरिकों के लिए प्रक्रिया आसान हो रही है। कांकेर जिले के अभनपुर-सरोना निवासी किसान चंद्रशेखर निषाद ने पंजीयन व्यवस्था में हुए इस तकनीकी बदलाव का लाभ लिया। संपत्ति का पंजीयन होने के बाद ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया। इससे उनका समय बचा और नामांतरण के लिए अलग से कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ी।

‘सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में चंद्रशेखर निषाद ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था और इसके लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। इस बार ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी।

चंद्रशेखर निषाद ने कहा, “मेरा नामांतरण तुरंत हो गया। इससे मेरे समय की बहुत बचत हुई और मुझे अलग से कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े।”

ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों में जाकर प्रक्रिया पूरी कराने की आवश्यकता कम हो रही है। किसानों और आम नागरिकों के लिए यह सुविधा संपत्ति संबंधी कार्यों को अधिक सहज बनाने में सहायक है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने, पहचान सत्यापन को मजबूत करने और ऑनलाइन सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों के समय और अनावश्यक दौड़भाग को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

पंजीयन व्यवस्था में आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान के सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाएं भी पंजीयन प्रक्रिया को आसान बना रही हैं। नागरिक नेट बैंकिंग और UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से पंजीयन शुल्क का भुगतान कर सकते हैं।

चंद्रशेखर निषाद का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में किए गए तकनीकी सुधारों का लाभ केवल रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया भी आसान हो रही है। ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से इंतजार और कार्यालयीन दौड़भाग से राहत मिल रही है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई चंद्रशेखर की कहानी पंजीयन सेवाओं में आ रहे बदलाव की जमीनी तस्वीर प्रस्तुत करती है। रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय से नागरिकों का समय बच रहा है और संपत्ति से जुड़े कार्य अधिक सहज एवं पारदर्शी हो रहे हैं।

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