नई दिल्ली, 31 मई 2026

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, इस विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए ‘टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल’ पर विचार कर रही है।

प्रस्तावित मॉडल के तहत पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया को दो चरणों में लागू किया जा सकता है। पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ करीब 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जाने की तैयारी है। इसके बाद 2034 तक पूरे देश को एक साझा चुनावी चक्र में लाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस योजना का उद्देश्य राज्यों में बार-बार होने वाले चुनावों से बचना और चुनावी खर्च को कम करना है। साथ ही, इससे प्रशासनिक संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को भी घटाने की उम्मीद जताई जा रही है।

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने विभिन्न हितधारकों और विशेषज्ञों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट 14 मार्च 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में देशभर में एक साथ चुनाव कराने के लिए आवश्यक संवैधानिक और कानूनी बदलावों पर सुझाव दिए गए हैं।

गौरतलब है कि 1952 से 1967 तक देश में लोकसभा और अधिकांश विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। हालांकि, बाद में कई राज्यों में सरकारों के समय से पहले गिरने और लोकसभा के समयपूर्व भंग होने के कारण यह व्यवस्था समाप्त हो गई। तब से देश में अलग-अलग समय पर चुनाव कराए जाते रहे हैं।

अब सरकार और समिति साझा चुनावी प्रणाली को दोबारा लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो 2029 का चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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