नई दिल्ली,24 सितंबर 2026
UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में देशभर के कई व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने का ऐलान किया है। इस दिन व्यापारी UPI से भुगतान स्वीकार नहीं करने और ग्राहकों से कैश या कार्ड के जरिए भुगतान लेने की अपील कर रहे हैं।
व्यापारी संगठनों के मुताबिक, 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के P2M (Peer-to-Merchant) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40% शुल्क लागू किए जाने की बात है। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 बताई गई है। कारोबारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और अनाज जैसे कारोबार में मार्जिन पहले से कम है, ऐसे में MDR शुल्क से उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
23 सितंबर को मध्य प्रदेश में भी हुआ ‘No UPI Day’
इस विरोध के तहत 23 सितंबर को भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों में करीब 125 व्यापारिक संगठनों ने ‘No UPI Day’ मनाया। दावा किया गया कि इस दौरान राज्यभर में करीब 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ।
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) और पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन समेत कई संगठनों ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। MACCIA के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने कहा कि 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाया जाएगा और देश के विभिन्न राज्यों के व्यापारी संगठनों से इस संबंध में चर्चा की गई है।
इन संगठनों ने भी दिया समर्थन
‘No UPI Day’ को Federation of Retail Traders Welfare Association (FRTWA), All India Consumer Products Distributors Federation (AICPDF), All India Mobile Retailers Association (AIMRA), All India Jewellers and Goldsmith Federation (AIJGF) और Akhil Bharatiya Food Oil Traders Federation (AIEOTF) समेत कई व्यापारी संगठनों के समर्थन की बात कही गई है।
क्या है MDR?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क है। QR कोड या कार्ड के जरिए भुगतान होने पर बैंक, पेमेंट नेटवर्क और अन्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से लेनदेन पूरा होता है। इसी प्रक्रिया से जुड़े खर्च के लिए MDR लिया जाता है।
व्यापारी संगठन प्रस्तावित 0.40% शुल्क का विरोध कर रहे हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, UPI शुल्क को लेकर सामने आए दावों और प्रस्तावित व्यवस्था की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि संबंधित सरकारी/नियामकीय अधिसूचनाओं से की जानी चाहिए।


