रायपुर/सिंगापुर,6 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के जंगलों और वन्यजीव संपदा को वैश्विक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve का दौरा किया। उन्होंने यहां वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास प्रबंधन और पर्यटक सुविधाओं की आधुनिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर के अनुभवों से सीख लेकर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप इको-टूरिज्म का ऐसा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसमें वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिले।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ Mandai Wildlife Reserve का दौरा कर वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म से जुड़ी व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। मुख्यमंत्री साय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सिंगापुर में आयोजित प्रथम Singapore-India Network for Growth (SING) Forum 2026 में भाग लेने पहुंचे हैं।
छत्तीसगढ़ में इको-टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं
छत्तीसगढ़ की करीब 44 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र है। बस्तर से सरगुजा तक फैले घने जंगल, समृद्ध जैव-विविधता, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य राज्य को इको-टूरिज्म के लिए विशिष्ट आधार प्रदान करते हैं।
राज्य सरकार इन प्राकृतिक संसाधनों को बेहतर पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय भागीदारी से जोड़कर पर्यटन की नई संभावनाएं तलाश रही है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसरों को बढ़ाना है।
स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित होगा मॉडल
Mandai Wildlife Reserve में मुख्यमंत्री साय ने प्राकृतिक परिवेश में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटक अनुभव, प्रबंधन व्यवस्था और जागरूकता गतिविधियों का अध्ययन किया। उन्होंने जोर दिया कि छत्तीसगढ़ में विकास का मॉडल राज्य की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और जैव-विविधता के अनुरूप होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर की व्यवस्थाओं को हूबहू अपनाने के बजाय वहां के सफल अनुभवों को छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुसार उपयोग में लाया जाएगा। लक्ष्य ऐसा इको-टूरिज्म मॉडल तैयार करना है, जिसमें जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा स्थानीय समुदायों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय के नए अवसर पैदा हों।
बस्तर से सरगुजा तक पर्यटन की नई संभावनाएं
बस्तर, कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी जैसे क्षेत्र छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पर्यटन क्षमता को दर्शाते हैं। इन क्षेत्रों में संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का बेहतर समन्वय राज्य को राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय इको-टूरिज्म मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।


