रायपुर, 8 अक्टूबर 2026

राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सड्डू निवासी 60 वर्षीय शिक्षक को साइबर ठगों ने खुद को ATS, NIA और पुलिस का अधिकारी बताकर करीब तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर 18 लाख रुपये ठग लिए।

मामले में रायपुर रेंज साइबर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ठगों ने शिक्षक को बताया कि उनके आधार नंबर से जम्मू-कश्मीर में बैंक खाता खोला गया है और उसमें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी गतिविधियां सामने आई हैं।

ATS अधिकारी बनकर किया फोन

शिक्षक अखिलेश कुमार मिश्र ने पुलिस को बताया कि 24 सितंबर को स्कूल से छुट्टी के बाद घर पहुंचने पर दोपहर करीब एक बजे उनके मोबाइल पर फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को नया रायपुर ATS कार्यालय का वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बताया।

ठग ने दावा किया कि शिक्षक के आधार नंबर से जम्मू-कश्मीर में बैंक खाता खोला गया है और उसमें मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया है। साथ ही लखनऊ ATS से उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही गई।

शिक्षक को तत्काल ATS कार्यालय आने के लिए कहा गया। उनके असमर्थता जताने पर फोन करने वाले ने उन्हें दूसरे कथित अधिकारी से बात कराई, जिसने भी यही कहानी दोहराई।

वर्दी पहने युवक ने वीडियो कॉल पर की पूछताछ

कुछ देर बाद शिक्षक के मोबाइल पर WhatsApp वीडियो कॉल आया। वीडियो में पुलिस की वर्दी पहने करीब 25 से 30 साल का युवक दिखाई दिया। कुछ देर बाद उसने अपना वीडियो बंद कर दिया, जबकि शिक्षक का वीडियो चालू रखा।

इसके बाद ठगों ने शिक्षक से उनके परिवार, बच्चों, बैंक खातों, एफडी, वाहन और चल-अचल संपत्ति की जानकारी जुटाई। शिक्षक ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपने बेटे-बेटी, उनकी शादी और रहने की जगह समेत संपत्ति से जुड़ी कई जानकारियां ठगों को दे दीं।

NIA अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाया

अगले दिन ठगों ने शिक्षक की कथित आईजी विक्रम सिंह और फिर कथित NIA अधिकारी राकेश अग्रवाल से बात कराई। दोनों ने शिक्षक को बताया कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।

शिक्षक ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह कभी जम्मू-कश्मीर नहीं गए और वहां उनका कोई बैंक खाता भी नहीं है। इसके बावजूद कथित अधिकारियों ने जांच का डर दिखाते हुए उनसे कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी चल संपत्ति की रकम RTGS के माध्यम से जमा करनी होगी।

‘नॉट इन्वॉल्वमेंट सर्टिफिकेट’ के नाम पर ठगी

ठगों ने शिक्षक को भरोसा दिलाया कि रकम जमा करने के बाद उन्हें NIA कोर्ट से ‘नॉट इन्वॉल्वमेंट सर्टिफिकेट (NIC)’ मिलेगा। इसके बाद RBI उनकी संपत्ति की जांच कर यह प्रमाणित करेगा कि उनकी रकम वैध है।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से शिक्षक ठगों के झांसे में आ गए। 25 सितंबर को उन्होंने बैंक की पंडरी शाखा पहुंचकर अपनी FD तुड़वाई और रकम बैंक खाते में ट्रांसफर कराई।

27 सितंबर को 18 लाख रुपये का RTGS

लगातार बारिश के कारण अगले दिन शिक्षक बैंक नहीं पहुंच पाए। इसके बाद 27 सितंबर को उन्होंने 18 लाख रुपये RTGS के जरिए IDFC First Bank के एक खाते में ट्रांसफर कर दिए। FIR में यह खाता ‘JAMKA VALVE’ नाम से दर्ज बताया गया है।

रकम ट्रांसफर करने के बाद शिक्षक ने WhatsApp पर ठगों को इसकी जानकारी दी। ठगों ने रकम ट्रांसफर होने की पुष्टि के लिए बैंक की जमा पर्ची मांगी। पर्ची नहीं मिलने पर उन्होंने शिक्षक से पासबुक अपडेट कर उसकी फोटो WhatsApp पर भेजने को कहा।

शिक्षक ने पासबुक अपडेट कर उसकी फोटो भेज दी। उसी दिन शाम करीब साढ़े चार बजे ठगों ने उन्हें RBI का कथित प्रमाणपत्र भी भेज दिया।

पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।

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