रायपुर, 9 अक्टूबर 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में 57वीं जीएसटी परिषद ने कई महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इन फैसलों को व्यापार सुगमता और कर प्रशासन के सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जीएसटी 2.0 के जरिए कर दरों में सुधार के बाद अब प्रक्रियागत सुधारों पर विशेष जोर दिया गया है। इनका उद्देश्य व्यापारियों का अनुपालन बोझ कम करना, कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।

जीएसटी कानून से गिरफ्तारी की शक्ति हटाने की सिफारिश

जीएसटी परिषद ने धारा 69 से गिरफ्तारी की शक्ति हटाने की महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए कर राशि की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।

सामान्य जुर्माने की राशि भी 25 हजार रुपये से घटाकर अधिकतम 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है। इससे सामान्य प्रक्रियागत त्रुटियों और छोटे मामलों में व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी। हालांकि जानबूझकर कर चोरी और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

ई-वे बिल जांच में सख्ती, बिना ठोस सूचना नहीं रोके जाएंगे वाहन

ई-वे बिल जांच की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। किसी मालवाहक वाहन को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस सूचना होना आवश्यक होगा। साथ ही संयुक्त आयुक्त या उससे उच्च स्तर के अधिकारी की अनुमति भी अनिवार्य होगी।

ई-वे बिल की जांच संबंधित राज्य में ही की जा सकेगी, जहां माल भेजने वाला या प्राप्त करने वाला स्थित है। केवल रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में जांच के नाम पर वाहनों को रोकने की व्यवस्था पर नियंत्रण होगा।

इससे माल परिवहन में अनावश्यक देरी कम, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और आपूर्ति श्रृंखला को गति मिलने की उम्मीद है।

रिफंड प्रक्रिया होगी तेज और स्वचालित

जीएसटी रिफंड प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की सिफारिश की गई है। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का पूरा रिफंड सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकृत किए जाने का प्रस्ताव है।

निर्यात और Inverted Duty Structure से जुड़े मामलों में रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि तत्काल मंजूर करने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। वहीं रिफंड आवेदन की जांच की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है।

इससे व्यापारियों और उद्यमियों की कार्यशील पूंजी जल्द उपलब्ध हो सकेगी और विशेष रूप से निर्यातकों तथा छोटे एवं मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा।

जीएसटी पंजीयन और ई-कॉमर्स कारोबार होगा आसान

जीएसटी पंजीयन एवं संशोधन की प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने का प्रस्ताव है। मुख्य व्यवसाय स्थल को छोड़कर पंजीयन से जुड़ी अन्य जानकारियों में पोर्टल के माध्यम से स्वतः संशोधन की सुविधा दी जा सकेगी। पंजीयन निरस्त कराने की प्रक्रिया भी अधिक सरल और स्वचालित होगी।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए वस्तुओं की बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत देने की सिफारिश की गई है। इससे उन्हें प्रत्येक राज्य में अलग कार्यालय स्थापित करने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी और छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप तथा नए उद्यमियों को देशभर के बाजार तक पहुंचने में सुविधा होगी।

इनपुट टैक्स क्रेडिट का बढ़ेगा दायरा

जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा का दायरा बढ़ाने संबंधी सिफारिशें भी की हैं। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पात्रता के आधार पर आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री परिसर के बाहर स्थापित पाइपलाइन पर भी ITC की सुविधा मिल सकेगी।

इससे कर पर कर लगने की समस्या कम होगी और उद्योगों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत घटाने में मदद मिलेगी।

छोटे व्यापारियों को नोटिस, जुर्माने और लेट फीस में राहत

छोटे करदाताओं को राहत देने के लिए भी कई प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। 10 हजार रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं करने का प्रस्ताव है।

धोखाधड़ी से संबंधित नहीं होने वाले मामलों में निर्धारित समय के भीतर कर और ब्याज जमा करने पर केवल पांच प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

इसके अलावा पांच करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को रिटर्न में देरी पर राहत देने की सिफारिश की गई है। यदि वे संबंधित महीने के अंत तक रिटर्न दाखिल कर देते हैं तो उन्हें विलंब शुल्क से छूट मिल सकेगी।

1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि इन प्रक्रियागत सुधारों को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 के बाद अब कर अनुपालन, पंजीयन, रिफंड, ई-वे बिल जांच और दंडात्मक प्रावधानों में सरलीकरण की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इससे व्यापार जगत में विश्वास बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत को भी मिलेगा लाभ

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के व्यापार, उद्योग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और MSME सेक्टर पर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार निवेश, उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। केंद्र के कर सुधारों और राज्य के व्यापार सुगमता संबंधी प्रयासों से औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

विकसित भारत 2047 के संकल्प को मिलेगी मजबूती

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कर संग्रह बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद कर प्रणाली विकसित करना है, जो व्यापारियों को सुविधा दे और उद्यमिता को प्रोत्साहित करे।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी प्रावधानों में बदलाव, ई-वे बिल जांच में सुधार, स्वचालित रिफंड, सरल पंजीयन, ITC का विस्तार और छोटे व्यापारियों को राहत जैसे कदम व्यापार सुगमता की दिशा में दूरगामी साबित होंगे।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों से देश में निवेश और उद्यमिता को नई ऊर्जा मिलेगी तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को मजबूती मिलेगी। वित्त मंत्री ने इन सुधारों के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया।

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