रायपुर, 09 अक्टूबर 2026

सेवा संकल्प अभियान के तहत नागरिक सेवाओं में किए गए सुधारों का प्रत्यक्ष लाभ अब आम लोगों को मिल रहा है। राजनांदगांव की श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन व्यवस्था में हुए बदलावों का अनुभव साझा किया। दोनों महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक बचत हुई। वहीं, उनकी संपत्ति की रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया महज 30 मिनट में पूरी हो गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं।

महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत

महिला क्रेताओं के लिए संपत्ति अंतरण संबंधी दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया है। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त किए जाने का लाभ भी महिलाओं को मिल रहा है।

नम्रता और प्रिया खंडेलवाल को इन दोनों रियायतों का लाभ मिला, जिससे संपत्ति पंजीयन पर होने वाला कुल खर्च कम हुआ और उन्हें करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। दोनों महिलाओं ने बताया कि शुल्क में कमी से अपने नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना पहले की तुलना में अधिक किफायती हुआ है।

महज 30 मिनट में पूरी हुई रजिस्ट्री

प्रिया खंडेलवाल ने बताया कि उप-पंजीयक कार्यालय में उनकी रजिस्ट्री और संबंधित प्रक्रिया लगभग 30 मिनट में पूरी हो गई। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल भुगतान और तकनीक आधारित सुविधाओं से पंजीयन प्रक्रिया अधिक आसान और सुविधाजनक हुई।

नई व्यवस्था के कारण अनावश्यक इंतजार और कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी भी कम हुई है।

डिजिटल सुविधाओं से आसान हुआ पंजीयन और नामांतरण

पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार समय निर्धारित कर सकते हैं, जबकि ऑनलाइन भुगतान के जरिए शुल्क का डिजिटल भुगतान किया जा सकता है।

इसके अलावा आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी व्यवस्थाओं से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है।

ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है।

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहन

महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से संपत्ति खरीदने और उसका विधिवत पंजीयन कराने का आर्थिक भार कम हुआ है। यह पहल महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

नम्रता और प्रिया खंडेलवाल को मिली करीब 30 हजार रुपये की बचत और कम समय में पूरी हुई रजिस्ट्री इस व्यवस्था के प्रत्यक्ष लाभ का उदाहरण है।

सुशासन से मिली दोहरी राहत

नम्रता और प्रिया ने पंजीयन शुल्क में रियायत और डिजिटल सुविधाओं से मिले लाभ के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शुल्क में राहत के साथ कम समय में पंजीयन की सुविधा से उनका अनुभव पहले की तुलना में बेहतर रहा।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव भी संकलित कर रहा है।

राजनांदगांव की नम्रता और प्रिया की कहानी बताती है कि नागरिक सेवाओं में किए गए प्रशासनिक सुधारों का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उसका सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचता है। महज 30 मिनट में रजिस्ट्री और करीब 30 हजार रुपये की बचत उनके लिए समय, धन और अनावश्यक परेशानी से मिली राहत का प्रत्यक्ष अनुभव है।

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