पटना, 15 अप्रैल 2026
बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पटना स्थित लोक भवन में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना है और लंबे समय तक चले नीतीश कुमार के दौर का अंत हो गया है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई शुरुआत
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया था। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि
57 वर्षीय सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर 1990 के दशक में शुरू हुआ था। उन्होंने शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की और बाद में 2018 में भाजपा में शामिल हो गए। 2023 में वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने और 2024 में उपमुख्यमंत्री पद संभाला।
वे एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक रहे, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं।
रणनीतिक दांव के तौर पर देखा जा रहा फैसला
सम्राट चौधरी की नियुक्ति को भाजपा की रणनीतिक चाल माना जा रहा है, खासकर ओबीसी वर्ग, विशेषकर कोइरी/कुशवाहा समुदाय में पकड़ मजबूत करने के लिहाज से। उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली और संगठन में मजबूत पकड़ को पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।
एनडीए नेताओं ने दी शुभकामनाएं
शपथ ग्रहण से पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सम्राट चौधरी से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में बिहार विकास और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ेगा।
नई सरकार से बढ़ी उम्मीदें
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब राज्य में विकास, सुशासन और राजनीतिक संतुलन को लेकर नई उम्मीदें जुड़ी हैं। आने वाले समय में उनकी सरकार की प्राथमिकताएं और फैसले बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे।


