रायपुर, 5 अक्टूबर 2026
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम अमारू में महिला स्वसहायता समूहों की दीदियां लेमन ग्रास की खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। कभी परिवार की सीमित आय में घर-गृहस्थी संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं अब संगठित होकर खेती और स्वरोजगार के माध्यम से परिवार की आर्थिक ताकत बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ और महिला सशक्तिकरण के संकल्प को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। योजनाओं के समन्वय से महिलाओं को स्वसहायता समूह, आर्थिक सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
20 एकड़ में 10 महिला समूहों ने शुरू की लेमन ग्रास की खेती
जनपद पंचायत पेंड्रा के ग्राम अमारू में गठित 10 महिला स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने करीब 20 एकड़ भूमि पर सामूहिक रूप से लेमन ग्रास की खेती शुरू की है। इनमें ज्योति महिला समूह, महामाया समूह, जय संतोषी माता समूह और हनी समूह सहित अन्य समूह शामिल हैं।
महिलाओं का यह प्रयास सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध भूमि के बेहतर उपयोग से स्थायी ग्रामीण आजीविका का नया मॉडल तैयार करने की दिशा में कदम है।
लेमन ग्रास से तैयार होगा सुगंधित तेल
लेमन ग्रास एक सुगंधित और औषधीय पौधा है, जिससे प्राप्त तेल का उपयोग विभिन्न उत्पादों में किया जाता है। अमारू की महिलाएं फसल तैयार होने के बाद तेल निकालकर बाजार और औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं।
ज्योति महिला समूह की सदस्य श्रीमती गायत्री काशीपुरी ने बताया कि उनके समूह की 11 सदस्य पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास से तेल निकालकर बाजार एवं औषधीय संस्थानों में बेचने की योजना है। इसका उपयोग चाय, इत्र और विभिन्न औषधीय उत्पादों में किया जाता है।
सरकारी सहायता से बढ़े आजीविका के अवसर
महामाया समूह की श्रीमती सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की श्रीमती पाबरिया भानू और हनी समूह की श्रीमती पूजा ध्रुव ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं के लिए आजीविका के कई नए रास्ते खुले हैं।
समूहों को 15 हजार रुपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और बैंक लिंकेज का लाभ मिला है। इस आर्थिक सहयोग और समूह की सामूहिक शक्ति से महिलाएं लेमन ग्रास की खेती के साथ सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस, सब्जी बाड़ी, किराना दुकान, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ रही हैं।
इन गतिविधियों से महिलाओं की स्वयं की आय बढ़ने, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने और निर्णय लेने के आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है।
‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में मजबूत कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वसहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय बढ़ाकर उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दे रही है।
अमारू में लेमन ग्रास की खेती इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित होने पर यह महिलाओं के लिए नियमित और बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।
खेतों के साथ बढ़ रहे महिलाओं के सपने
ग्राम अमारू की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की तस्वीर पेश कर रही है। महिलाओं की मेहनत, स्वसहायता समूहों की ताकत और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलकर गांव में आजीविका के नए अवसर तैयार कर रहे हैं।
लेमन ग्रास की खेती से जुड़ी महिलाएं अब सिर्फ खेती नहीं कर रहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। अमारू की यह पहल ग्रामीण छत्तीसगढ़ में महिला आधारित आजीविका के नए मॉडल के रूप में उभर रही है।


