नक्सल भय का अंत, अबूझमाड़ में फिर जीवंत हुई ‘घोटुल’ की गौरवशाली परंपरा
नक्सल प्रभाव में कमी और बेहतर सुरक्षा माहौल के बीच अबूझमाड़ में घोटुल की पारंपरिक संस्कृति फिर जीवंत होने लगी है। अंदरूनी गांवों में ग्रामीण प्राकृतिक सामग्रियों से घोटुल तैयार कर रहे हैं, जहां युवा लोकगीत, नृत्य, संगीत, सामाजिक अनुशासन और परंपराएं सीख रहे हैं।


