रायपुर, 21 सितंबर 2026

सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित दूसरी पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ का उद्देश्य देश के बच्चों की प्रतिभा, सपनों और क्षमताओं को अवसरों से जोड़कर विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव तैयार करना है। भारत के करोड़ों बच्चों के सपने ही आने वाले भारत की तस्वीर तय करेंगे।

किसी बच्चे का सपना अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने का है, तो कोई डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, खिलाड़ी, उद्यमी या शोधकर्ता बनना चाहता है। वहीं कई बच्चे अपने गांव और समाज के लिए कुछ नया करने का सपना देखते हैं। इन सपनों को सही शिक्षा, कौशल और अवसर मिलने पर यही बच्चे भविष्य के राष्ट्रनिर्माता बनेंगे।

अभियान के तहत बच्चों के भविष्य को आकार देने में शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, तकनीकी समझ, कौशल और नवाचार की भावना विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। पीएम श्री स्कूलों में आधुनिक शिक्षा के साथ प्रयोग, खेल, कला, तकनीक और अनुभव आधारित सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

दूरस्थ ग्रामीण, पहाड़ी और वन क्षेत्रों के बच्चों तक शिक्षा के अवसर पहुंचाना भी इस दिशा में अहम है। एकलव्य आवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय समाज के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर मिल रहे हैं। इससे उन विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, जिनके लिए बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना कभी कठिन सपना हुआ करता था।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रयास आवासीय विद्यालय भी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। यहां जेईई, नीट और क्लैट जैसी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और तैयारी का वातावरण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दे रहा है।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आधुनिक शहरों और नई तकनीकों तक सीमित नहीं है। इसकी वास्तविक तस्वीर तब बनेगी, जब देश का प्रत्येक बच्चा यह विश्वास कर सके कि वह अपने सपनों को पूरा कर सकता है। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी दक्षता युवाओं को रोजगार पाने के साथ रोजगार पैदा करने की क्षमता भी दे सकती है।

25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ केवल बच्चों के भविष्य की बात नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य से जुड़ा संकल्प है। स्कूल की प्रयोगशाला में प्रयोग करने वाला विद्यार्थी, एकलव्य विद्यालय में पढ़ने वाला जनजातीय बच्चा, प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाला युवा और अपने गांव में नया रास्ता तलाशने वाला विद्यार्थी—सभी 2047 के भारत की तस्वीर को आकार देंगे।

देश की नई पीढ़ी को शिक्षा, अवसर, कौशल और सही दिशा उपलब्ध कराना राष्ट्रनिर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जब करोड़ों बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और सपनों को पूरा करने का अवसर मिलेगा, तब भारत की विकास यात्रा और मजबूत होगी।

25 करोड़ बच्चों के सपने 25 करोड़ संभावनाएं हैं। इन सपनों को अवसर और सही दिशा मिलेगी, तो यही संभावनाएं वर्ष 2047 के विकसित भारत की नई कहानी लिखेंगी।

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