रायपुर, 27 सितंबर 2026

कभी भौगोलिक विषमताओं, सुदूर वनांचलों और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर संभाग में अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से शिक्षा, अवसर और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच दूरस्थ क्षेत्रों तक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा उच्च शिक्षा और युवाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा के बजट में 50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बस्तर की प्रतिभाओं को बेहतर संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कई पहल की गई हैं।

‘मेरु’ अनुदान से उच्च शिक्षा को नई दिशा

बस्तर के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए ‘छू लो आसमान’, ‘ज्ञानगुड़ी’ और ‘हमर लक्ष्य’ जैसी योजनाओं के माध्यम से कोचिंग और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

जगदलपुर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत ‘मेरु’ (MERU) योजना से 100 करोड़ रुपए का अनुदान मिला है। इस राशि से विश्वविद्यालय में शोध एवं अनुसंधान केंद्र, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, कौशल विकास केंद्र और आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जा रही है।

रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों से युवाओं को अवसर

शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में 20 नए अध्ययन विभाग शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए नए पदों की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई है।

युवाओं को रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए फार्मेसी, विधि और शारीरिक शिक्षा जैसे व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP) की शुरुआत की जा रही है।

इसके अलावा ‘इनोवेशन महाकुंभ’ जैसे आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी सोच, स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही उच्च शिक्षा

‘सेवा संकल्प’ का विस्तार संभागीय मुख्यालय तक सीमित न रखते हुए बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक किया जा रहा है। सरकारी महाविद्यालयों के कायाकल्प के लिए 65 करोड़ रुपए की विशेष प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इसके तहत अध्ययन भवन, छात्रावास, खेल मैदान और बाउंड्रीवाल जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है।

काकतीय पीजी कॉलेज, जगदलपुर में 5 करोड़ रुपए की राशि से प्रयोगशालाओं, ऑडिटोरियम और स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए जाएंगे। वहीं इंदरु केंवट कन्या महाविद्यालय, कांकेर में भी 5 करोड़ रुपए की अनुदान राशि से छात्राओं के लिए आधुनिक सुविधाएं और विशेष अध्ययन केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।

नगरनार और किलेपाल जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में नए शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना से ग्रामीण और जनजातीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम होगी।

शिक्षा और नवाचार के जरिए बदल रहा बस्तर

बस्तर में हो रहे बदलाव का प्रभाव केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं है। शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्वरोजगार और नवाचार के अवसरों के विस्तार से युवा नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहे हैं।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा और विकास की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बस्तर के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और नवाचार के अवसर मिल रहे हैं और वे छत्तीसगढ़ तथा देश के विकास में अपनी भागीदारी बढ़ा रहे हैं।

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