रायपुर, 3 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा 25 से 30 सितंबर तक प्रदेश के 6 जिलों के 312 वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया। इनमें कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जिले शामिल हैं।
वन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत बोर्ड एवं क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) से वैद्यों के प्रमाणीकरण के लिए अधिकृत संस्था सेंटर फॉर ट्रेड टेस्टिंग एंड सर्टिफिकेशन ऑफ स्किल्ड वर्कर्स (CTTC) द्वारा यह प्रक्रिया पूरी की गई।
प्रमाणीकरण के तहत वैद्यों की 5 प्रकार की उपचार विधाओं का परीक्षण किया गया। इनमें सामान्य बीमारी, पीलिया, आर्थराइटिस, बोन सेटिंग और जहरीले बाइट का उपचार शामिल हैं।
दो चरणों में होता है प्रमाणीकरण
वैद्यों का प्रमाणीकरण दो चरणों की परीक्षण प्रक्रिया पूरी करने के बाद किया जाता है। पहले दिन आवेदन फॉर्म की जांच के साथ वैद्यों की उपचार विधाओं का मौखिक परीक्षण, ताजी औषधीय पौधों एवं कच्चे औषधीय उत्पादों की पहचान, औषधि निर्माण की विधि और मरीजों को दी जाने वाली औषधि की मात्रा का परीक्षण किया जाता है।
प्रमाणीकरण प्रक्रिया के दूसरे दिन वैद्यों के घर जाकर उपचार करने का सजीव परीक्षण किया जाता है। साथ ही उपचार लेने वाले मरीजों से फीडबैक भी लिया जाता है।
25 से 30 सितंबर के बीच विभिन्न जिलों में आयोजित परीक्षणों में कुल 312 वैद्यों को प्रमाणीकृत किया गया। इनमें कोंडागांव के 60, नारायणपुर के 23, कांकेर के 60, धमतरी के 135 तथा गरियाबंद एवं महासमुंद के 34 वैद्य शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ शासन और बोर्ड द्वारा मार्च 2027 तक 1 हजार वैद्यों के प्रमाणीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।


