रायपुर, 30 सितंबर 2026

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही 50 प्रतिशत पंजीयन शुल्क की छूट का लाभ बलौदाबाजार की श्रीमती पायल भट्टर को मिला। संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान शुल्क में मिली राहत से उनकी 1 लाख 32 हजार रुपये की बचत हुई। पायल भट्टर ने पूरी बची राशि अपनी बेटी के बचत खाते में जमा कर दी, ताकि भविष्य में उसकी शिक्षा और अन्य जरूरतों में यह राशि काम आ सके।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत हितग्राहियों से सीधे संवाद के दौरान श्रीमती पायल भट्टर ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पंजीयन शुल्क में मिली छूट से संपत्ति खरीदने का खर्च कम हुआ और बची राशि को बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का अवसर मिला।

रजिस्ट्री में बची रकम बनी बेटी के भविष्य की पूंजी

श्रीमती पायल भट्टर ने बताया कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर मिलने वाली शुल्क छूट से उन्हें ₹1.32 लाख की बचत हुई। उन्होंने इस राशि को खर्च करने के बजाय अपनी बेटी के बचत खाते में जमा करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि भविष्य में यह राशि बेटी की शिक्षा, जरूरत या किसी महत्वपूर्ण अवसर पर काम आ सकती है।

पायल भट्टर के लिए यह केवल रजिस्ट्री के खर्च में हुई बचत नहीं, बल्कि बेटी के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने की शुरुआत है। उनका अनुभव बताता है कि शासन की किसी नीति का लाभ जब परिवार की जरूरत और भविष्य की योजना से जुड़ता है, तो उसका असर सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है।

महिलाओं के नाम संपत्ति से बढ़ी आर्थिक सुरक्षा

श्रीमती भट्टर ने महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में दी जा रही रियायत को आर्थिक राहत देने वाली पहल बताया। उन्होंने कहा कि अपने नाम संपत्ति होने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना मजबूत होती है। पंजीयन शुल्क में बची राशि को बेटी के नाम सुरक्षित करना उनके लिए इस पहल का अतिरिक्त लाभ रहा।

उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट

राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत दी जा रही है। इसके तहत पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस पहल का उद्देश्य संपत्ति स्वामित्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक राहत उपलब्ध कराना है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत हितग्राहियों से सीधा संवाद

‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर यह जान रहा है कि शासन की सुविधाओं और सुधारों का लाभ नागरिकों तक किस रूप में पहुंच रहा है। पायल भट्टर की कहानी इसी जमीनी बदलाव का उदाहरण है, जहां पंजीयन शुल्क में मिली ₹1.32 लाख की राहत अब उनकी बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार बन रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप, वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा सेवाओं को अधिक सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

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