रायपुर,21 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ में तोते और भारतीय छतदार कछुए (Indian Roofed Turtle) जैसे संरक्षित वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त पर वन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन संरक्षित जीवों को खरीदना, बेचना या बिना वैध अनुमति के पालना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दंडनीय अपराध है और दोषी पाए जाने पर जेल की सजा हो सकती है।
हाल ही में बिलासपुर के जरहाभाठा मंदिर चौक स्थित एक पेट शॉप पर वन विभाग ने छापेमारी कर चार भारतीय छतदार कछुए बरामद किए। कार्रवाई के दौरान विभाग के एक कर्मचारी को ग्राहक बनाकर भेजा गया, जिसने 1,500 रुपये में एक कछुआ खरीदकर अवैध बिक्री की पुष्टि की। इसके बाद दुकान संचालक को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और न्यायालय ने उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कछुओं को नागपुर से खरीदकर बिलासपुर लाया था। इसके आधार पर वन विभाग ने नागपुर वन विभाग को भी सूचना भेजी है, ताकि अवैध तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
वन विभाग के अनुसार भारतीय छतदार कछुआ भारत, नेपाल और बांग्लादेश के मीठे पानी के जलाशयों में पाया जाने वाला संरक्षित जलीय जीव है, जो पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई जंगली पक्षी या संरक्षित जीव अवैध रूप से बेचा जाता दिखे या पिंजरे में कैद मिले, तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें।


