रायपुर, 22 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रायपुर जिले के चंपारण्य में करीब ₹73.42 करोड़ की लागत से प्रस्तावित “श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (CSMC) ने मंजूरी दे दी है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा और इसे पूरा करने के लिए 18 माह की प्रस्तावित अवधि निर्धारित की गई है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति महत्वपूर्ण कदम है।

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। चंपारण्य में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित करने के साथ महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति को प्रदेश के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

15 एकड़ में विकसित होगा आधुनिक स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स

महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर के वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत और अनुभव-आधारित पर्यटन के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है।

करीब 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी से जुड़ी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।

म्यूजियम से लेकर ओपन एयर थिएटर तक होंगी सुविधाएं

प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स विकसित की जाएंगी।

इसके अलावा यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे, कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है।

श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों को भी मिलेगा नया अनुभव

परियोजना में धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना है। इससे परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए चंपारण्य में नए अनुभव विकसित होंगे।

परियोजना की परिकल्पना इस तरह की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों और वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक समय तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है।

निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी

परियोजना की डीपीआर और कार्य-सीमा तैयार है। स्वीकृति के बाद अब निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। परियोजना पूरी होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने में मदद मिलेगी।

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