रायपुर, 3 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित, सुलभ और नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने एक वर्ष पूरा कर लिया है। 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के तहत अब 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं। योजना से ऐसे 850 गांव पहली बार नियमित बस सेवा से जुड़े हैं, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

एक वर्ष में योजना की बसों ने करीब 24 लाख किलोमीटर का सफर तय किया है। वर्तमान में बसें प्रतिदिन लगभग 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। योजना के अधिसूचित मार्गों की कुल लंबाई करीब 5,300 किलोमीटर है। अधिकांश मार्गों पर प्रतिदिन दो ट्रिप संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना के एक वर्ष पूरे होने पर कहा कि सुदूर गांवों में रहने वाले नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक सहज पहुंच का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बन रही है।

34 बसों से हुई थी शुरुआत, अब 107 बसें संचालित

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का शुभारंभ 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में किया था। शुरुआत में 34 मार्गों पर बस सेवा शुरू की गई थी और करीब 250 गांवों को जोड़ा गया था। एक वर्ष में योजना का विस्तार होकर अब 106 मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं।

प्रथम चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया है। बस्तर संभाग में 51 मार्गों पर 50 बसें तथा सरगुजा संभाग में 55 मार्गों पर 57 बसें चल रही हैं।

बस्तर संभाग के सुकमा में 8 मार्गों पर 9 बसें, दंतेवाड़ा में 7 मार्गों पर 7 बसें, बीजापुर में 11 मार्गों पर 11 बसें, नारायणपुर में 4 मार्गों पर 4 बसें, बस्तर में 5 मार्गों पर 5 बसें, कांकेर में 12 मार्गों पर 12 बसें और कोंडागांव में 8 मार्गों पर 9 बसें संचालित हैं।

सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 8 मार्गों पर 8 बसें, सूरजपुर में 10 मार्गों पर 9 बसें, बलरामपुर में 7 मार्गों पर 7 बसें, जशपुर में 16 मार्गों पर 16 बसें, कोरिया में 6 मार्गों पर 6 बसें तथा मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 4 मार्गों पर 4 बसें चल रही हैं।

पिकअप पर निर्भर ग्रामीणों को मिली नियमित बस सुविधा

बस्तर और सरगुजा के कई दुर्गम गांवों में नियमित बस सेवा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को पिकअप और अन्य मालवाहक वाहनों से सफर करना पड़ता था। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए लंबी दूरी की यात्रा विशेष रूप से कठिन होती थी।

कम यात्री संख्या वाले दुर्गम मार्गों पर निजी बस संचालन व्यावसायिक रूप से चुनौतीपूर्ण होने के कारण राज्य शासन ने वित्तीय सहायता के जरिए नियमित यात्री परिवहन का मॉडल तैयार किया।

कोंटा-जगरगुंडा मार्ग पर आवागमन हुआ आसान

सुकमा जिले के कोंटा-जगरगुंडा के करीब 83 किलोमीटर मार्ग पर भी योजना का प्रभाव देखने को मिला है। बस सेवा शुरू होने के बाद ग्रामीणों के लिए आवागमन सुगम हुआ है।

फील्ड आकलन के अनुसार महिलाएं बच्चों और सामान के साथ बस से सुरक्षित सफर कर रही हैं। स्कूली विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने और मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक आने-जाने में सुविधा मिली है।

ग्रामीण आम, महुआ, मुर्गी और अन्य वनोपज लेकर हाट-बाजार तक पहुंच पा रहे हैं और उसी दिन अपने गांव लौट सकते हैं। काम के लिए बाहर जाने वाले मजदूरों और युवाओं को भी बस सेवा से आवागमन में सुविधा मिली है।

गांवों तक पहुंच रहा बाजार, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का असर केवल यात्रियों के आवागमन तक सीमित नहीं है। बसों के माध्यम से ग्रामीण अपने उत्पाद और वनोपज हाट-बाजार तक पहुंचा रहे हैं, जबकि बाजार से आवश्यक सामग्री गांवों तक पहुंच रही है।

नियमित परिवहन संपर्क से गांव, हाट-बाजार, विकासखंड और जिला मुख्यालय के बीच आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा मिला है। कई मार्गों पर सुरक्षा बलों के कैंप स्थित हैं, जहां पदस्थ जवानों को भी आवागमन की सुविधा मिल रही है।

कम यात्री वाले मार्गों पर सरकार दे रही वित्तीय सहायता

दुर्गम और कम यात्री संख्या वाले मार्गों पर बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता देती है। पहले वर्ष 26 रुपये, दूसरे वर्ष 24 रुपये और तीसरे वर्ष 22 रुपये प्रति किलोमीटर सहायता का प्रावधान है।

यह सहायता अधिकतम तीन वर्ष तक दी जाती है। योजना के तहत संचालित वाहनों को मासिक मोटरयान कर में भी अधिकतम तीन वर्ष तक छूट का प्रावधान है। अब तक 107 बस संचालकों को कुल 5.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।

GPS से हर बस की निगरानी, किलोमीटर के आधार पर भुगतान

योजना में पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बस में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाया गया है। इसके माध्यम से परिवहन विभाग के कंट्रोल एवं कमांड सेंटर में बसों की निगरानी की जाती है।

MMGBY पोर्टल पर बसों की लाइव ट्रैकिंग, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी उपलब्ध रहती है। संचालकों को वित्तीय सहायता का भुगतान अधिसूचित मार्ग पर वास्तव में चले किलोमीटर के आधार पर ऑनलाइन VLTD रिपोर्ट के अनुसार किया जाता है।

यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की समय-सारिणी बस संगवारी ऐप पर भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दूसरे चरण में 4,368 गांवों को जोड़ने की तैयारी

योजना के दूसरे चरण में आठ नए जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों के 85 आदिवासी विकासखंडों में बस सेवा शुरू करने की तैयारी है। इसमें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बालोद, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और धमतरी जिले शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में बस सुविधा से वंचित 4,368 गांवों को योजना के दायरे में लाने की तैयारी है। इससे करीब 14.57 लाख लोगों को परिवहन सुविधा मिलने की संभावना है। दूसरे चरण में 60 से 80 बसों का संचालन प्रस्तावित है।

यात्रियों की सुविधा के लिए बस किराए का भुगतान UPI और QR कोड के माध्यम से करने की सुविधा भी प्रस्तावित है।

विशेष वर्गों को किराए में छूट

योजना में दृष्टिबाधित, बौद्धिक दिव्यांग, दोनों पैरों से चलने में असमर्थ व्यक्तियों, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तथा एचआईवी या एड्स पीड़ित व्यक्तियों को सहायक सहित किराए में शत-प्रतिशत छूट का प्रावधान है। कलेक्टर द्वारा प्रमाणित नक्सल प्रभावित व्यक्तियों को 50 प्रतिशत किराया छूट दी जाती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य परिवहन सुविधा को केवल शहरों और प्रमुख मार्गों तक सीमित न रखकर अंतिम छोर पर बसे गांवों तक पहुंचाना है। आने वाले समय में योजना का विस्तार करते हुए अधिक से अधिक बस सुविधा विहीन गांवों को नियमित यात्री परिवहन से जोड़ने की तैयारी है।

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