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ऊर्जा संकट के बीच PM मोदी का 5 देशों का दौरा क्यों अहम? व्यापार, निवेश और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

14 मई 2026 | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के साथ नई तकनीकों और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

UAE से होगी दौरे की शुरुआत

प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से होगी। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, तकनीक और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा होगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए खाड़ी देशों से तेल और गैस आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। UAE में करीब 45 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिससे यह रिश्ता आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर अहम बनता है।

नीदरलैंड में निवेश और सेमीकंडक्टर पर चर्चा

UAE के बाद प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड का दौरा करेंगे। यहां उनकी मुलाकात किंग विलेम-अलेक्जेंडर, क्वीन मैक्सिमा और प्रधानमंत्री रॉब जेटन से होगी। दोनों देशों के बीच रक्षा, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। 2024-25 में भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार करीब 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

स्वीडन और नॉर्वे में ग्रीन टेक्नोलॉजी पर जोर

इसके बाद प्रधानमंत्री स्वीडन और नॉर्वे जाएंगे, जहां ग्रीन ट्रांजिशन, AI, स्टार्टअप, रक्षा, जलवायु परिवर्तन और सप्लाई चेन सहयोग पर चर्चा होगी। नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे।

इटली में निवेश और रक्षा सहयोग पर फोकस

दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी इटली जाएंगे। यहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला से होगी। दोनों देशों के बीच रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी।

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