रायपुर, 30 सितंबर 2026

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में स्वसहायता समूह अहम भूमिका निभा रहे हैं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम धनडोंगरी की लखपति दीदी श्रीमती दिनेश्वरी सोरी इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने सामान्य गृहिणी से सफल स्वरोजगार संचालक बनने तक का सफर तय किया है।

समूह के सहयोग से शुरू किया कारोबार

श्रीमती दिनेश्वरी सोरी ‘जय सेवा जय बूढ़ा देव स्वसहायता समूह’ से जुड़ीं। शुरुआत में उनके सामने पूंजी की कमी बड़ी चुनौती थी, लेकिन समूह और ग्राम संगठन से मिले वित्तीय सहयोग ने उनकी राह आसान की।

समूह से मिले ऋण और अनुदान की मदद से उन्होंने अगरबत्ती बनाने की मशीन खरीदी और व्यवस्थित रूप से उत्पादन शुरू किया। इसके बाद बैंक से एक लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया।

कई उत्पादों से बढ़ाई आमदनी

स्थानीय बाजार की मांग और अपनी रुचि को ध्यान में रखते हुए दिनेश्वरी ने एक साथ कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया। वर्तमान में वे मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती, साबुन, निरमा, गुलाल, मोमबत्ती, गोबर के दीये और चूड़ी निर्माण से जुड़े उत्पाद तैयार कर रही हैं।

अलग-अलग उत्पादों के निर्माण और बिक्री से उन्हें नियमित आमदनी का जरिया मिला है। इससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी और परिवार की आय में भी इजाफा हुआ।

52 हजार से बढ़कर डेढ़ लाख रुपये हुई वार्षिक आय

बिहान योजना से जुड़ने से पहले दिनेश्वरी का परिवार मुख्य रूप से कृषि और मजदूरी पर निर्भर था। उस समय परिवार की वार्षिक आय करीब 52 हजार रुपये थी।

स्वरोजगार के नए साधन विकसित करने के बाद अब उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये हो गई है। नियमित आमदनी से परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में आसानी हो रही है और आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

दिनेश्वरी सोरी की सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। उन्होंने अपने इस सफर में मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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