बिलासपुर,1 अक्टूबर 2026
दुष्कर्म की घटना से गर्भवती हुई नाबालिग पीड़िता के गर्भसमापन की मांग को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने धमतरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पीड़िता को तत्काल रायपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में कानून के अनुसार गर्भसमापन कराने के निर्देश दिए हैं।
मार्च 2025 में हुआ था कथित यौन हमला
पीड़िता ने अपने प्राकृतिक संरक्षक के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि मार्च 2025 में नाबालिग के साथ कथित यौन हमला हुआ था। शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) और पॉक्सो एक्ट की धाराओं 4 और 6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मेडिकल बोर्ड ने बताई 31 सप्ताह 6 दिन की गर्भावस्था
हाईकोर्ट ने 23 सितंबर को मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता की जांच के निर्देश दिए थे। 25 सितंबर की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार गर्भावस्था 31 सप्ताह 6 दिन की थी। रिपोर्ट में भ्रूण को जीवित और सामान्य रूप से विकसित बताया गया।
मेडिकल बोर्ड ने कहा कि इस अवस्था में गर्भसमापन के दौरान रक्तस्राव, संक्रमण और अन्य जटिलताओं का जोखिम हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और उचित चिकित्सा सुविधाओं के साथ प्रक्रिया संभव बताई गई। धमतरी अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण पीड़िता को उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थान में उपचार देने की सिफारिश की गई।
पीड़िता की गरिमा और मानसिक पीड़ा को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म से जुड़ी गर्भावस्था से होने वाली मानसिक पीड़ा को कानून गंभीर चोट के रूप में मानता है। कोर्ट के अनुसार, नाबालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर करना उसकी गरिमा, निजता, शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन संबंधी अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।
कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए ऐसे मामलों में पीड़िता के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देने की बात कही।
रायपुर में होगी जरूरी चिकित्सा व्यवस्था
हाईकोर्ट ने रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पीड़िता के उपचार के लिए एम्बुलेंस, रक्त, नवजात देखभाल और मनोवैज्ञानिक सहायता समेत सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही जांच के लिए भ्रूण संबंधी जैविक नमूने सुरक्षित रखने और आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया गया है।


