रायपुर, 08 अक्टूबर 2026
सरगुजा की श्याम घुनघुट्टा परियोजना जिले के किसानों और शहरवासियों के लिए जीवनदायिनी जलस्रोत बनी हुई है। करीब 35 वर्ष पुरानी इस परियोजना की 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से 63 गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच रहा है। अल्प वर्षा के दौरान भी यह परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हुई है।
परियोजना की उपयोगिता केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से अम्बिकापुर शहर को भी प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस तरह श्याम घुनघुट्टा परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और शहरी क्षेत्र में पेयजल, दोनों जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
23.81 करोड़ रुपये से पुरानी नहरों को मिला नया जीवन
लगभग 35 वर्ष पुरानी नहरों में समय के साथ दरारें और जल रिसाव की समस्या सामने आई थी। कई स्थानों पर जलीय जीव-जंतुओं द्वारा बिल बनाए जाने से भी नहरें क्षतिग्रस्त हो रही थीं। इससे जल प्रवाह और किसानों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावित होती थी।
इन समस्याओं के समाधान के लिए जल संसाधन विभाग ने नहरों के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य की योजना तैयार की। इसके लिए 08 मार्च 2019 को 2381.84 लाख रुपये यानी करीब 23.81 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
स्वीकृत राशि से नहरों का जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य पूरा किया गया। इससे पुरानी नहरों की स्थिति में सुधार के साथ जल प्रवाह और वितरण व्यवस्था भी बेहतर हुई है।
अल्प वर्षा में किसानों के लिए बनी बड़ी राहत
सरगुजा जिले में वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान अल्प वर्षा की स्थिति बनी थी। बारिश कम होने से खेतों में पानी की कमी और फसलों की सिंचाई को लेकर किसानों के सामने चुनौती खड़ी हुई थी।
ऐसे समय में श्याम घुनघुट्टा परियोजना की नहरों से 63 गांवों में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया गया। इससे किसानों को वर्षा की कमी के बावजूद कृषि कार्य जारी रखने में मदद मिली।
वर्षा पर निर्भर किसानों के लिए जरूरत के समय नहरों से पानी मिलना खेती के लिए महत्वपूर्ण सहारा है। परियोजना ने अल्प वर्षा की स्थिति में भी खेतों तक पानी पहुंचाकर कृषि गतिविधियों को मजबूती दी।
236 किलोमीटर की नहर प्रणाली से 63 गांवों को सिंचाई सुविधा
श्याम घुनघुट्टा परियोजना के अंतर्गत करीब 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली विकसित है। इसके माध्यम से जिले के 63 गांवों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा रहा है।
नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग से जल प्रवाह एवं वितरण व्यवस्था में सुधार हुआ है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के बाद पानी के अधिक व्यवस्थित वितरण में सहायता मिली है।
विशेष रूप से बारिश की अनिश्चितता के बीच नहरों से उपलब्ध पानी किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त और भरोसेमंद सिंचाई स्रोत प्रदान करता है।
खेतों की सिंचाई के साथ अम्बिकापुर की भी बुझा रही प्यास
श्याम घुनघुट्टा परियोजना अम्बिकापुर शहर की पेयजल व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अमृत योजना के अंतर्गत नगर निगम अम्बिकापुर को प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस प्रकार एक ही परियोजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा कर रही है। गांवों में किसानों को फसलों के लिए पानी मिल रहा है, वहीं अम्बिकापुर शहर में नागरिकों की पेयजल जरूरतों के लिए जल उपलब्ध हो रहा है।
जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से मजबूत हुई व्यवस्था
पुरानी नहरों का समय पर जीर्णोद्धार और लाइनिंग उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नहरों की संरचनात्मक स्थिति मजबूत हुई और जल प्रवाह में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिली है।
श्याम घुनघुट्टा परियोजना यह दर्शाती है कि उपलब्ध जल संसाधन संरचनाओं का संरक्षण, रखरखाव और बेहतर प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत श्याम घुनघुट्टा परियोजना की यह उपलब्धि जल संसाधनों के संरक्षण, बेहतर प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार का उदाहरण है। 236 किलोमीटर की नहर प्रणाली से 63 गांवों की खेती को सिंचाई का सहारा मिल रहा है, जबकि अम्बिकापुर शहर को भी 8.93 मिलियन घनमीटर वार्षिक जल उपलब्ध कराया जा रहा है।


