रायपुर, 29 सितंबर 2026
राजधानी रायपुर के सुनियोजित विस्तार और नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा ग्राम कचना, लामांडी और सड्डू में नगर विकास योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 49 एवं 50 के प्रावधानों के तहत तैयार योजना का उद्देश्य क्षेत्र का व्यवस्थित विकास करते हुए भूस्वामियों को सड़क, जलापूर्ति, सीवर, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं से युक्त सुनियोजित अंतिम भूखंड उपलब्ध कराना है।
योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किसी भी भूमिस्वामी को भूमिहीन नहीं किया जाएगा। मूल भूखंड स्वामियों को उनकी भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा मिश्रित भू-उपयोग के अंतर्गत अंतिम भूखंड के रूप में आवंटित करने का प्रस्ताव है। वहीं 100 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले मूल भूखंड स्वामियों के लिए भी नेबरहुड शॉपिंग क्षेत्र में अंतिम भूखंड का प्रावधान किया गया है।
खंडित भूमि के बदले मिलेगा व्यवस्थित और उपयोगी भूखंड
नगर विकास योजना से उन भूस्वामियों को लाभ होगा, जिनकी भूमि अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है या मौजूदा स्वरूप में उसका समुचित विकास कठिन है। खंडित स्वामित्व वाली भूमियों को बसरा नंबर के आधार पर एकीकृत कर पूर्ण रकबे के अनुरूप एक अंतिम भूखंड आवंटित करने का प्रस्ताव है।
इससे भूमि का व्यवस्थित उपयोग संभव होगा और भूस्वामियों को बेहतर आकार तथा नियोजित क्षेत्र में विकास का अवसर मिलेगा। योजना के तहत नियमानुसार आकार के अंतिम भूखंड उसी ग्राम में प्रस्तावित किए गए हैं, जहां संबंधित भूमिस्वामी के मूल भूखंड स्थित हैं।
45 मीटर तक चौड़ी सड़कें देंगी बेहतर कनेक्टिविटी
नगर विकास योजना तैयार करते समय भौतिक सर्वेक्षण के आधार पर मौजूदा और प्रस्तावित मार्गों का संरेखण किया गया है। योजना में 45 मीटर, 30 मीटर, 24 मीटर और 18 मीटर चौड़े मार्गों के साथ 18 मीटर एवं 12 मीटर चौड़े मार्गों का भी प्रावधान किया गया है।
भूखंडों के आकार और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बड़े क्षेत्रफल वाले भूखंडों को 45 मीटर, 30 मीटर और 24 मीटर चौड़े मार्गों से जोड़ने का प्रस्ताव है। वहीं अपेक्षाकृत छोटे भूखंडों को 18 मीटर और 12 मीटर चौड़े मार्गों पर आवंटित करने की योजना है। इससे भविष्य में बढ़ने वाली आबादी और गतिविधियों को देखते हुए आवागमन, प्रवेश-निकास तथा यातायात प्रबंधन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
6.7 एकड़ खुला क्षेत्र और 4.8 एकड़ में नगरीय वन
योजना में आवासीय और व्यावसायिक विकास के साथ पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। योजना क्षेत्र की कुल 7.29 प्रतिशत भूमि खुले स्थान एवं नगरीय वन के लिए आरक्षित की गई है।
इसके तहत करीब 6.7 एकड़ खुला क्षेत्र और लगभग 4.8 एकड़ भूमि पर नगरीय वन विकसित करने का प्रावधान है। इससे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और नागरिकों को बेहतर जीवन परिवेश उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस चौकी के लिए भूमि आरक्षित
नगर विकास योजना में सामाजिक अधोसंरचना के लिए कुल 7.94 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है। यहां विद्युत सब-स्टेशन, पुलिस चौकी, आंगनबाड़ी, विद्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी आवश्यक सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव है।
योजना में निम्न आयवर्ग के परिवारों के लिए भी भूमि आरक्षित की गई है। इसका उद्देश्य समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
चरणबद्ध प्रक्रिया के बाद तैयार हुई प्रारूप योजना
कचना, लामांडी और सड्डू नगर विकास योजना के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल से 10 सितंबर 2025 को सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हुई थी। इसके बाद योजना के आशय की घोषणा का प्रकाशन 5 दिसंबर 2025 को राजपत्र में किया गया।
प्राप्त आवेदनों एवं आपत्तियों की सुनवाई के लिए गठित अंतर्विभागीय समिति ने 12 फरवरी 2026 को सुनवाई की। इसके बाद प्रारूप नगर विकास योजना को 10 सितंबर 2026 को संचालक मंडल से स्वीकृति मिली और 11 सितंबर 2026 को इसका प्रकाशन किया गया।
अभी प्रस्तावित है भूखंड आवंटन, 10 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति
रायपुर विकास प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नगर विकास योजना में दर्शाया गया अंतिम भूखंड आवंटन अभी प्रस्तावित है। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 50(3) के तहत संबंधित पक्षों से 30 दिवस की अवधि में दावे एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।
भूस्वामी और संबंधित पक्ष 10 अक्टूबर 2026 तक अपने दावे एवं आपत्तियां प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस नगर विकास योजना में भूस्वामियों के हितों के साथ सड़क, हरित क्षेत्र, सामाजिक अधोसंरचना और आवश्यक नागरिक सुविधाओं को एकीकृत करते हुए कचना, लामांडी और सड्डू क्षेत्र के व्यवस्थित तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास की रूपरेखा तैयार की गई है।


