रायपुर,5 अक्टूबर 2026
रायपुर में गुमशुदगी के मामले पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। शनिवार से रविवार के बीच महज 24 घंटे में 159 लोगों की गुमशुदगी की FIR दर्ज हुई। इनमें 78 महिलाएं, 54 वयस्क पुरुष, 17 बच्चे व नाबालिग और 10 बुजुर्ग शामिल हैं। यानी राजधानी में औसतन हर घंटे करीब 7 लोग लापता हुए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस ने गुमशुदगी की जांच का तरीका बदला है। अब केवल लापता व्यक्ति की तलाश तक जांच सीमित नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी व्यक्ति को बंधक बनाकर तो नहीं रखा गया या गलत तरीके से छिपाया गया है। ऐसे मामलों में तथ्यों के आधार पर बीएनएस की धारा 140(3) के तहत भी अपराध दर्ज किया जा रहा है।
महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा
24 घंटे में दर्ज गुमशुदगी के मामलों में 78 महिलाएं शामिल हैं। इनमें गृहणियां, नवविवाहिता और कामकाजी महिलाएं हैं। इसके अलावा 54 वयस्क पुरुष, 17 बच्चे व नाबालिग और 10 बुजुर्ग लापता बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार पारिवारिक विवाद, पति-पत्नी के बीच अनबन, प्रेम संबंध, आर्थिक परेशानी, बेरोजगारी, नशे की लत, संपत्ति विवाद और घरेलू हिंसा जैसी वजहें भी गुमशुदगी के पीछे हो सकती हैं।
मुजगहन और उरला में सबसे ज्यादा मामले
रायपुर कमिश्नरेट में उरला में 18 और मुजगहन में 16 मामले दर्ज हुए। इसके बाद गुढ़ियारी में 13, खमतराई में 11 और टिकरापारा में 9 मामले सामने आए। डीडी नगर और पंडरी में 7-7, जबकि आमानाका, गंज, राजेंद्र नगर और खम्हारडीह में 5-5 मामले दर्ज हुए।
ग्रामीण थाना क्षेत्रों में खरोरा में 7, तिल्दा नेवरा में 5, जबकि अभनपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और सिलतरा में 4-4 गुमशुदगी के मामले सामने आए।
शादी के अगले दिन दुल्हन हुई लापता
गोलबाजार थाना क्षेत्र में शादी के अगले ही दिन 25 वर्षीय नवविवाहिता छाया लहरे के लापता होने का मामला सामने आया। 23 मई को शादी के बाद 24 मई को परिवार खरीदारी के लिए जवाहर मार्केट पहुंचा था। इसी दौरान पति के कुछ देर के लिए दूर जाने पर महिला लापता हो गई।
इसके अलावा आमानाका थाना क्षेत्र में ओडिशा निवासी 31 वर्षीय खलासी, माना कैंप के वरिष्ठजन आश्रम से 72 वर्षीय बुजुर्ग और जशपुर से इलाज के लिए रायपुर लाई गई 43 वर्षीय महिला के लापता होने के मामले भी दर्ज हैं।
अब गुमशुदगी से अपराध की जांच तक
विशेष लोक अभियोजक केके चंद्राकर के अनुसार, पहले गुम इंसान का प्रकरण दर्ज कर जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर धाराएं जोड़ी जाती थीं। अब परिस्थितियों के अनुसार बीएनएस की धारा 140(3) में भी अपराध दर्ज किया जा रहा है और शुरुआत से ही बंधक बनाए जाने या गलत तरीके से छिपाने की आशंका की जांच की जा रही है।
डीसीपी तारकेश्वर पटेल के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गुमशुदगी के मामलों में अपराध दर्ज कर जांच की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अब इस व्यवस्था की असली कसौटी यही होगी कि पुलिस लापता लोगों तक कितनी तेजी से पहुंच पाती है।


