रायपुर, 5 अक्टूबर 2026


सुनील त्रिपाठी
सहायक संचालक जनसंपर्क


आमजन का जीवन तब आसान होता है, जब शासकीय योजनाएं कागजों और कार्यालयों से निकलकर सीधे उनके जीवन का हिस्सा बनती हैं। किसी जरूरतमंद परिवार को पक्की छत, किसी महिला को आर्थिक संबल, किसान के खेत तक सिंचाई और बच्चों को बेहतर पोषण जैसी सुविधाएं मिलती हैं, तब जनसेवा का वास्तविक अर्थ सामने आता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी योजनाओं और नागरिक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान 2026 के दौरान सामने आई बदलाव की कहानियां बताती हैं कि किसी योजना की सफलता केवल उसके प्रावधानों में नहीं, बल्कि उससे नागरिक के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव में होती है।

कच्ची दीवारों से पक्के सपनों तक

सरगुजा में पीएम जनमन योजना के माध्यम से पहाड़ी कोरवा परिवारों तक पक्के आवास की सुविधा पहुंची है। मोहन राम जैसे परिवारों के लिए पक्का घर बारिश और मौसम की परेशानियों से राहत के साथ सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का भरोसा लेकर आया है।

उदयपुर क्षेत्र के हुडकू राम, बिरझु, रतन साय और छन्दू जैसे परिवारों के गृह प्रवेश की खुशी बताती है कि आवास केवल मकान नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की नींव है। पक्की छत से बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण और परिवार को सुरक्षित जीवन मिलता है।

कार्यालय नहीं, नागरिक के करीब पहुंच रहा शासन

तकनीक के माध्यम से शासन और नागरिक के बीच की दूरी कम करने के लिए ‘सेवा सेतु’ जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऑनलाइन आवेदन, आवेदन की स्थिति, डिजिटल प्रमाण पत्र, क्यूआर आधारित सत्यापन और डिजिटल सूचना जैसी सुविधाओं से सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

अम्बिकापुर की डॉली गंधर के आधार कार्ड में नाम संबंधी समस्या का समाधान सेवा सेतु के माध्यम से हुआ, जिससे बैंक खाता और छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। वहीं सीएम हेल्पलाइन 1076 के जरिए सरगुजा की छात्रा आराधना सिंह की आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार संबंधी समस्या का समाधान हुआ।

महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल

महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें परिवार की जरूरतों के संबंध में निर्णय लेने का अवसर दे रही है। सरगुजा की राखी पति के निधन के बाद अपने दो बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। खेती और सिलाई के साथ उन्हें योजना से मिलने वाली सहायता से बच्चों के पोषण और सिलाई सामग्री में मदद मिल रही है।

यह आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए केवल राशि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आर्थिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता का माध्यम भी बन रही है।

बिहान से आत्मनिर्भरता तक

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आयमूलक गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

अम्बिकापुर की कल्पना सिंह ने समूह से ऋण लेकर खीरे की खेती शुरू की और बैंगन, टमाटर व तरबूज जैसी फसलों का उत्पादन भी बढ़ाया। उदयपुर की मति बाई ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया।

सरगुजा में ‘छेरी बैंक’ जैसे नवाचार भी महिलाओं को पशुपालन आधारित आजीविका से जोड़ रहे हैं। ‘लखपति दीदी’ की पहचान महिलाओं के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की यात्रा का प्रतीक बन रही है।

कुपोषण से सुपोषण तक

बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अम्बिकापुर के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का उपचार और पोषण पुनर्वास किया जा रहा है।

शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज जैसे बच्चों के वजन में उपचार के दौरान हुई वृद्धि बेहतर पोषण और स्वास्थ्य की दिशा में सुधार का संकेत है। बच्चों के उपचार के साथ परिवारों को पोषण, स्वच्छता, स्तनपान, पूरक आहार और वृद्धि निगरानी की जानकारी भी दी जा रही है।

वैज्ञानिक पशुपालन से मजबूत होती आजीविका

ग्रामीण परिवारों के लिए पशुपालन आय का महत्वपूर्ण साधन है। वैज्ञानिक तकनीक, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य और विभागीय मार्गदर्शन से पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

सीतापुर विकासखंड के दयासागर ने पशुपालन विभाग की सलाह से कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार अपनाया। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ा और उनकी नियमित आय का आधार मजबूत हुआ।

लुण्ड्रा के जयनाथ राम ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के सहयोग से बकरी पालन को आजीविका का माध्यम बनाया।

खेत तक सिंचाई, बढ़ी समृद्धि की संभावनाएं

किसानों के लिए सिंचाई की सुविधा खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सरगुजा में सौर सुजला योजना के जरिए किसानों तक सौर सिंचाई पंप पहुंचाए जा रहे हैं।

लबेद सिंह जैसे किसान सौर सिंचाई की सुविधा से धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जियां, फलदार पौधे और फूलों की खेती जैसी गतिविधियों को अपना रहे हैं। खेती के साथ मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर अतिरिक्त आय के स्रोत भी विकसित किए जा रहे हैं।

मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण और डबरी आधारित मछली पालन जैसे प्रयास खेती को वैज्ञानिक, विविध और आयोन्मुखी बनाने में मदद कर रहे हैं।

योजनाओं से आगे, जीवन में बदलाव ही सुशासन की पहचान

आवास, डिजिटल सेवाएं, महिला सशक्तिकरण, आजीविका, पोषण, पशुपालन और कृषि अलग-अलग क्षेत्र जरूर हैं, लेकिन इनका उद्देश्य एक ही है—नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना।

किसी परिवार के लिए सुशासन पक्के घर की सुरक्षित छत है, किसी छात्रा के लिए सुधरा हुआ दस्तावेज, किसी महिला के लिए आर्थिक संबल, किसी किसान के लिए खेत तक पहुंचा सिंचाई का पानी और किसी बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य।

यही छोटे-बड़े बदलाव मिलकर जनकल्याण की व्यापक तस्वीर तैयार करते हैं।

सेवा से विश्वास, सुशासन से जनकल्याण

सेवा संकल्प अभियान 2026 में सामने आई कहानियां बताती हैं कि शासन की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना नागरिक के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव है। जब सेवा समय पर मिले, प्रक्रिया सरल हो और जरूरतमंद को योजनाओं का लाभ मिले, तभी जनसेवा अपने वास्तविक उद्देश्य तक पहुंचती है।

तकनीक के जरिए शासन नागरिक के करीब पहुंच रहा है, वहीं आवास, आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि और आजीविका से जुड़ी योजनाएं लोगों को बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं। इस प्रक्रिया में हितग्राही केवल सहायता पाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने बेहतर भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts