LPG संकट के बीच सूरत रेलवे स्टेशन पर अफरा-तफरी, घर लौटते मजदूरों की भीड़ पर लाठीचार्ज
सूरत (गुजरात), 19 अप्रैल 2026
मिडिल-ईस्ट तनाव से पैदा हुए LPG संकट का असर अब देश के औद्योगिक शहर सूरत में साफ दिखाई देने लगा है। उधना रेलवे स्टेशन पर रविवार को घर लौटने वाले मजदूरों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे हालात बेकाबू हो गए और पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग भगदड़ जैसे हालात में जान बचाकर भागते नजर आ रहे हैं।
लाइन तोड़ने से बिगड़े हालात, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
सुबह करीब 11:30 बजे उधना-हसनपुर ट्रेन के लिए यात्रियों को कतार में खड़ा किया जा रहा था, तभी कुछ लोगों ने लाइन तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई और पुलिस व आरपीएफ को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। वायरल वीडियो में यात्री पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए लोहे की जालियों पर चढ़ते दिख रहे हैं।
21 हजार से ज्यादा यात्री, व्यवस्था हुई फेल
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दोपहर तक 6 ट्रेनों के जरिए 21,000 से अधिक यात्रियों को रवाना किया जा चुका था, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया। लगातार अपील के बावजूद अव्यवस्था बढ़ती गई, जिसके चलते सख्त कदम उठाने पड़े।
LPG संकट और पलायन बना मुख्य कारण
जानकारी के मुताबिक, पिछले एक-दो महीनों से LPG संकट के कारण सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है और मजदूरों को काम की कमी के चलते घर लौटना पड़ रहा है। इसके साथ ही समर वेकेशन के कारण यात्रियों की संख्या और बढ़ गई है, जिससे रेलवे पर दबाव दोगुना हो गया है।
वीडियो में दिखा मजदूर का दर्द
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक मजदूर भावुक होकर कहता नजर आ रहा है—“अब नहीं आऊंगा दोस्त…”। यह वीडियो सूरत से हो रहे पलायन और मजदूरों की मजबूरी को दर्शाता है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भी बड़ा असर
गैस की कमी के चलते सूरत की वीविंग इंडस्ट्री को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। करीब 30% यानी लगभग 3 लाख मजदूर पलायन कर चुके हैं, जिससे उत्पादन घटकर 6.5 करोड़ मीटर से 4.5 करोड़ मीटर प्रतिदिन रह गया है। इंडस्ट्री को रोजाना करीब 15,000 गैस सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन सप्लाई पर्याप्त नहीं है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है और रेलवे लगातार भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास कर रहा है। हालांकि, यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो पलायन और आर्थिक नुकसान दोनों बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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