नोएडा की चिंगारी दिल्ली तक पहुँची: न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग, NCCEBL ने सरकार को लिखा पत्र
नई दिल्ली/नोएडा: न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में भड़की मजदूरों की नाराज़गी अब दिल्ली तक पहुँच गई है। नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर (NCCEBL) ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर न्यूनतम मजदूरी दरों में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की है।कमेटी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री, श्रम सचिव और प्रमुख सचिव से अपील करते हुए कहा है कि मजदूरों की इस जायज मांग को गंभीरता से लिया जाए और 2026 की नई न्यूनतम मजदूरी दरें तुरंत घोषित की जाएं, ताकि हजारों गरीब और प्रवासी मजदूरों को समय पर राहत मिल सके।
हर साल 1 अप्रैल तक होनी चाहिए घोषणा पत्र में कहा गया है कि परंपरा के अनुसार हर साल 1 अप्रैल तक नई मजदूरी दरों की घोषणा हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार देरी हो रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि देरी की स्थिति में दिहाड़ी और प्रवासी मजदूर, जो अक्सर काम के लिए स्थान बदलते रहते हैं, बढ़ी हुई मजदूरी का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
हर साल 1 अप्रैल तक होनी चाहिए घोषणापत्र में कहा गया है कि परंपरा के अनुसार हर साल 1 अप्रैल तक नई मजदूरी दरों की घोषणा हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार देरी हो रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि देरी की स्थिति में दिहाड़ी और प्रवासी मजदूर, जो अक्सर काम के लिए स्थान बदलते रहते हैं, बढ़ी हुई मजदूरी का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवालाकमेटी ने अपने पत्र में Secretary vs. Management of Reptakos Brett & Co. Ltd. (1992) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मजदूरी तय करते समय निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि असंगठित और प्रवासी मजदूरों को उनका अधिकार मिल सके।हरियाणा के फैसले के बाद भड़का नोएडा13 अप्रैल 2026 को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक इलाकों में मजदूरों ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। कई जगहों पर सड़क जाम, पथराव और वाहनों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
दरअसल, हरियाणा सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम मजदूरी में करीब 35% बढ़ोतरी किए जाने के बाद नोएडा के मजदूरों में असंतोष बढ़ा। मजदूर अब पड़ोसी राज्य के फैसले का हवाला देते हुए अपने लिए भी समान वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
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