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धार भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष की मांग स्वीकार

15 मई 2026 | धार

मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला विवाद मामले में हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला को मंदिर करार दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई और ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा केंद्र ‘भोजशाला’ था। कोर्ट ने हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य और रिकॉर्ड यह दर्शाते हैं कि विवादित स्थल का संबंध राजा भोज के काल से है और यहां लंबे समय से हिंदू धार्मिक गतिविधियां जारी रही हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि पूजा-अर्चना की परंपरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी।

धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था सख्त

फैसले से पहले प्रशासन ने धार जिले में धारा 163 लागू कर दी थी। पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस और धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और टिप्पणियों की निगरानी की जा रही है। पुलिस पेट्रोल-डीजल की बोतलों में बिक्री पर भी नजर बनाए हुए है।

क्या है भोजशाला विवाद?

भोजशाला विवाद हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच लंबे समय से चला आ रहा है। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। विशेष रूप से वसंत पंचमी के अवसर पर पूजा और नमाज को लेकर वर्षों से विवाद और तनाव की स्थिति बनती रही है।

2022 में दायर हुई थी याचिका

साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई थी। इसके बाद 2024 में ASI को वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया गया।

ASI सर्वे में क्या मिला?

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि परिसर में मिले 106 स्तंभ और 82 प्लास्टर पुराने मंदिर संरचना का हिस्सा थे। कई स्तंभों पर देवी-देवताओं, शेर और हाथियों की आकृतियों के अवशेष भी पाए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह स्थल मूल रूप से हिंदू मंदिर रहा होगा।

हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगें

हिंदू पक्ष ने कोर्ट में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार, नमाज पर रोक, केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट गठन और मां वाग्देवी की प्रतिमा की पुनर्स्थापना जैसी मांगें रखी थीं। कोर्ट के फैसले के बाद अब मामले को लेकर आगे की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

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