बस्तर में विश्वास की जीत: दण्डकारण्य में 25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी
रायपुर,01 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ में 31 मार्च 2026 का दिन वामपंथी उग्रवाद के अंत की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक पड़ाव के रूप में दर्ज हो रहा है। दण्डकारण्य क्षेत्र में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत 25 माओवादी कैडरों (12 महिलाएं सहित) ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। इस घटनाक्रम को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही हिंसा और भय की विचारधारा अब कमजोर पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह विश्वास, लोकतंत्र और जनशक्ति की जीत है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले इन 25 माओवादी कैडरों पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि भटके हुए लोगों का भरोसा अब लोकतांत्रिक व्यवस्था और पुनर्वास नीति पर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के चलते माओवादी नेटवर्क कमजोर हुआ है। इसी क्रम में 93 घातक हथियारों के साथ 14.06 करोड़ रुपये की बड़ी बरामदगी भी हुई है, जो नक्सली तंत्र पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।
उन्होंने इसे केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास की वापसी बताते हुए कहा कि दण्डकारण्य क्षेत्र अब शांति, स्थिरता और सामान्य जीवन की ओर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, 31 मार्च 2026 की यह तिथि छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस दिन के रूप में याद की जाएगी, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में ठोस परिणाम सामने आए और प्रदेश ने एक नए दौर की शुरुआत की।
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