भारत बन रहा ग्लोबल डेटा सेंटर हब, AI और डिजिटल इकोनॉमी को मिलेगा बड़ा बूस्ट
21 मई 2026 | नई दिल्ली
भारत तेजी से ग्लोबल डेटा सेंटर पावरहाउस बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड स्टोरेज और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच देश में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, रिलायंस और अडानी जैसी बड़ी कंपनियां भारत में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, नोएडा और विशाखापत्तनम जैसे शहर तेजी से डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित हो रहे हैं।
लोकल डेटा स्टोरेज से बढ़ेगी डिजिटल सुरक्षा
सरकार की लोकल डेटा स्टोरेज पॉलिसी के तहत बड़ी टेक कंपनियों को भारतीय यूजर्स का डेटा देश के भीतर ही स्टोर करना होगा। इससे डेटा सुरक्षा और निगरानी मजबूत होगी। साथ ही विदेशी सर्वर पर निर्भरता कम होने से डिजिटल संप्रभुता को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में बैंकिंग, हेल्थ, एजुकेशन और सरकारी सेवाओं का डेटा भी बड़े स्तर पर देश में ही सुरक्षित रखा जाएगा।
AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी से बढ़ी डेटा सेंटर की मांग
AI और जेनरेटिव AI टेक्नोलॉजी के तेजी से विस्तार के कारण भारी मात्रा में डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत दुनिया का लगभग 20% डेटा जेनरेट कर रहा है। ऐसे में डेटा को प्रोसेस और स्टोर करने के लिए हाई-टेक डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत चार गुना तक बढ़ सकती है।
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा का बड़ा निवेश
गूगल ने विशाखापत्तनम को अपना बड़ा डेटा सेंटर हब बनाने की योजना बनाई है। कंपनी अमेरिका से विशाखापत्तनम तक हाई कैपेसिटी सबसी केबल बिछाने पर काम कर रही है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट और मेटा भी भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए बड़े निवेश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार बड़ी टेक कंपनियां भारत में लगभग 200 बिलियन डॉलर तक निवेश कर सकती हैं।
अडानी और रिलायंस भी बना रहे AI रेडी डेटा सेंटर
भारतीय कंपनियां भी इस सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। अडानी ग्रुप ने 2035 तक AI रेडी और रिन्यूएबल एनर्जी आधारित डेटा सेंटर विकसित करने के लिए 100 बिलियन डॉलर निवेश की योजना बनाई है। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज भी नेक्स्ट जेनरेशन कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर नेटवर्क तैयार करने के लिए लगभग 120 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रही है।
रोजगार और लोकल इकोनॉमी को मिलेगा फायदा
डेटा सेंटर इंडस्ट्री के विस्तार से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। डेटा मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड इंजीनियरिंग, AI डेवलपमेंट और नेटवर्क ऑपरेशन जैसे सेक्टर में नई नौकरियां बढ़ेंगी। साथ ही जिन शहरों में डेटा सेंटर बन रहे हैं वहां लोकल इकोनॉमी, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।
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