संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की नई शुरुआत, आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौटे
रायपुर, 08 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब बदलाव की नई कहानियां सामने आ रही हैं। बीजापुर जिले के चेरली गांव के युवक मनकू कड़ती की कहानी इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों और भटकाव के बाद अपने जीवन को नई दिशा दी है।
कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन
मनकू कड़ती का बचपन गरीबी और असुरक्षा के माहौल में बीता। पारिवारिक परिस्थितियां उस समय और चुनौतीपूर्ण हो गईं, जब उनके पिता को जेल जाना पड़ा। इस घटना का उनके जीवन पर गहरा असर पड़ा और वे अस्थिर माहौल में बड़े हुए।
भटकाव से आत्मचिंतन तक का सफर
परिस्थितियों के प्रभाव में वे धीरे-धीरे गलत दिशा की ओर बढ़ने लगे, लेकिन समय के साथ उनके भीतर आत्मचिंतन की भावना जागृत हुई। उन्होंने महसूस किया कि हिंसा और भय का रास्ता उन्हें अंधकार की ओर ले जा रहा है, जिसके बाद उन्होंने जीवन बदलने का निर्णय लिया।
आत्मसमर्पण से खुला नया रास्ता
अप्रैल 2025 में मनकू कड़ती ने साहसिक कदम उठाते हुए आत्मसमर्पण किया। इसके बाद पुनर्वास प्रक्रिया के तहत उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त हुआ और उन्होंने ट्रैक्टर ऑपरेटर के रूप में कार्य करना सीखा। इस दौरान उनके जीवन में अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास का विकास हुआ।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
आज मनकू कड़ती एक नई सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन जी रहे हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
बदलाव की मजबूत मिसाल
मनकू कड़ती की कहानी यह दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियों और गलत राह पर जाने के बावजूद, दृढ़ संकल्प और सही दिशा मिलने पर जीवन को बदला जा सकता है। यह उदाहरण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलाव को भी उजागर करता है।
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