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फ्लाई ऐश से सड़क, STP के पानी से सिंचाई: छत्तीसगढ़ में NHAI का अनोखा ग्रीन हाईवे मॉडल चर्चा में

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रायपुर, 12 जून 2026

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए कई पहल शुरू की हैं। छत्तीसगढ़ में यह सतत विकास मॉडल साफ दिखाई दे रहा है, जहां रीसाइकिल किए गए औद्योगिक कचरे का उपयोग कर सड़क निर्माण किया जा रहा है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है।

फ्लाई ऐश के उपयोग में रिकॉर्ड वृद्धि

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए NHAI सड़क निर्माण में थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई ऐश का उपयोग कर रहा है। इसका बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ के बिजली संयंत्रों से प्राप्त हो रहा है।

पिछले वर्षों में फ्लाई ऐश के उपयोग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है—

  • 2024-25: रिकॉर्ड 2.17 करोड़ मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग।
  • 2025-26: 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई ऐश का इस्तेमाल।
  • 2026-27: चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 20 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग।

NHAI ने ग्रीन हाईवे विकसित करने के लिए अन्य वैकल्पिक सामग्रियों को भी अपनाया है।

  • 2024-25 में 30,477 मीट्रिक टन रीसाइकिल सामग्री जैसे स्टील स्लैग, वेस्ट टायर रबर और बायो-बिटुमेन का उपयोग किया गया।
  • 2025-26 में अतिरिक्त 2,691 मीट्रिक टन सामग्री का इस्तेमाल हुआ।

जल संरक्षण पर भी विशेष फोकस

सड़क निर्माण के साथ-साथ NHAI जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर भी काम कर रहा है।

  • अमृत सरोवर: राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 13 जलाशयों का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया।
  • वॉटर हार्वेस्टिंग: वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए वॉटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या 14 से बढ़ाकर 105 की गई।
  • पुनर्चक्रित जल: निर्माण कार्य और पौधारोपण में पीने योग्य पानी की बचत के लिए 323 किलोलीटर ट्रीटेड वाटर का उपयोग किया गया।

जंगलों में पर्यावरण-अनुकूल अधोसंरचना

वन्यजीवों के आवास को सुरक्षित रखने के लिए NHAI ने संवेदनशील क्षेत्रों में ईको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है।

इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण परियोजना Udanti-Sitanadi Tiger Reserve के भीतर बनाई जा रही 3 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग है। इससे वाहनों की आवाजाही जमीन के नीचे होगी और जंगलों पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा—

  • साउंड बैरियर लगाए जा रहे हैं ताकि वाहन शोर से वन्यजीव प्रभावित न हों।
  • पेड़ों पर रहने वाले जीवों के लिए मंकी कैनोपी बनाई जा रही है।
  • हाथियों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए एलिफेंट पास और एनिमल अंडरपास विकसित किए जा रहे हैं।

बी कॉरिडोर और मेडिसिन पार्क की पहल

छत्तीसगढ़ के मैदानी और वन क्षेत्रों में हाईवे किनारे बी कॉरिडोर (मधुमक्खी गलियारे) विकसित किए जाएंगे, जिससे प्राकृतिक परागण बढ़ेगा और किसानों की फसल उत्पादकता में सुधार होगा।

इसके साथ ही खाली जमीनों पर मेडिसिन पार्क स्थापित किए जाएंगे, जहां नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे हजारों औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।

“एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के तहत NHAI ने पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों और डिवाइडरों के किनारे 2.5 लाख से अधिक पौधे लगाकर हरित विकास का नया रिकॉर्ड बनाया।

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