प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूरोप दौरा तय, फ्रांस और स्लोवाकिया जाएंगे; G7 शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल
नई दिल्ली | डिजिटल डेस्क | 10 जून 2026
प्रधानमंत्री Narendra Modi 13 जून से 19 जून 2026 तक यूरोप के महत्वपूर्ण दौरे पर रहेंगे, जिसमें वे France और Slovakia की यात्रा करेंगे। इस दौरान वे फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय को और मजबूत करना है। यह यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को भी दर्शाती है।
फ्रांस में होगा पहला चरण
यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी 14 जून को फ्रांस के नीस शहर में फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
इसके अलावा, दोनों नेता संयुक्त रूप से “इंडिया इनोवेट्स” कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा
नीस से प्रधानमंत्री स्लोवाकिया जाएंगे, जहां वे द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे। वर्ष 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिसे ऐतिहासिक माना जा रहा है। यहां ऊर्जा, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
G7 शिखर सम्मेलन में भारत की मजबूत उपस्थिति
16-17 जून को प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख विकसित देश वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
इस दौरान प्रधानमंत्री कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं, जिसमें वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने पर बातचीत होगी।
पेरिस में टेक समिट में भागीदारी
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 18 जून को पेरिस में होने वाले “विवाटेक” (Vivatech) जैसे बड़े तकनीकी और स्टार्टअप इवेंट में शामिल होंगे, जहां भारत की डिजिटल प्रगति और स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
यह यूरोप दौरा भारत की विदेश नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें आर्थिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक कूटनीति को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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