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‘जम्मू-कश्मीर, लद्दाख की तरफ देखना भी मत’ : चीन-पाकिस्तान की बयानबाजी पर भारत की दोटूक चेतावनी

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नई दिल्ली, 27 मई 2026

भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न हिस्से हैं और इस मुद्दे पर किसी भी तीसरे देश की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के चीन दौरे के दौरान जारी संयुक्त बयान पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

चीन दौरे में फिर उठा कश्मीर मुद्दा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों तीन दिवसीय चीन दौरे पर हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से हुई। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का जिक्र किया गया, जिस पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया।

संयुक्त बयान में चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर, यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।

भारत का सख्त जवाब

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने दो टूक कहा कि:

“जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। इस मुद्दे पर किसी तीसरे देश को टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।”

उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख पूरी तरह अनुचित है और भारत इसे सिरे से खारिज करता है।

CPEC पर भी भारत की कड़ी आपत्ति

भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। भारत का कहना है कि इस परियोजना के कई हिस्से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से गुजरते हैं, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।

नई दिल्ली ने साफ कहा कि अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह की गतिविधि को वैध ठहराने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

जल संसाधन सहयोग के दावे पर भी सवाल

भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच कथित “सीमा पार जल संसाधन सहयोग” के दावे पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि दोनों देशों की आपसी सीमा सीधे तौर पर नहीं लगती, ऐसे में इस तरह के सहयोग का आधार स्पष्ट नहीं है।

इसके साथ ही भारत ने 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को भी अवैध बताया।

भारत का स्पष्ट संदेश

भारत के इस कड़े रुख को चीन और पाकिस्तान के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मुद्दे पर किसी भी तरह की बयानबाजी या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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