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नक्सलवाद के साए से निकलकर विकास की नई राह पर बढ़ रहा बस्तर

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Bastar अब नक्सलवाद की पहचान से बाहर निकलकर विकास, विश्वास और जनसेवा की नई तस्वीर पेश कर रहा है। वर्षों तक हिंसा और भय के माहौल से जूझने वाला बस्तर अब तेजी से बदल रहा है। राज्य सरकार और मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में सुरक्षा के साथ-साथ विकास योजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के बस्तर दौरे ने इस बदलाव को नई दिशा दी। उनके दौरे को बस्तर में “खूनी गनतंत्र” से “जनतंत्र और विकास” की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है।

नक्सल प्रभावित इलाकों में बनाए गए सुरक्षा कैंप अब जनसेवा केंद्रों में बदलते नजर आ रहे हैं। नेतानार स्थित “शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा” इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां अब ग्रामीणों को आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय-जाति प्रमाण पत्र, आयुष्मान भारत योजना और शिक्षा जैसी 370 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सरकार का कहना है कि डिजिटल गवर्नेंस और जनसुविधाओं के विस्तार से बस्तर में लोगों का भरोसा मजबूत हो रहा है। डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वाहनों की शुरुआत से कानून व्यवस्था को भी और अधिक मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

‘बस्तर 2.0 विजन’ के तहत बस्तर को विकास, पर्यटन और रोजगार का नया केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि अब बस्तर की पहचान भय नहीं, बल्कि विकास और विश्वास से होगी।

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