महाराष्ट्र में बढ़ीं सियासी अटकलें, उद्धव गुट और शिंदे गुट के नेताओं की बढ़ती मुलाकातों से गरमाई राजनीति
20 मई 2026 | मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेताओं और एकनाथ शिंदे गुट के बीच लगातार बढ़ती मुलाकातों ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है। हाल के दिनों में उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसदों ने शिंदे गुट के नेताओं से मुलाकात की है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित दल-बदल और अंदरूनी बदलाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
यूबीटी सांसदों की शिंदे गुट से लगातार मुलाकातें
शिर्डी से शिवसेना (यूबीटी) सांसद भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे ने मंत्री उदय सामंत से मुलाकात की। बताया गया कि यह बैठक उनके लोकसभा क्षेत्र के विकास कार्यों और निजी मामलों को लेकर थी। इससे पहले यूबीटी सांसद नागेश अस्तिकार ने भी अपने क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी।
वहीं, नासिक में आयोजित एक कार्यक्रम में शिंदे गुट के नेता श्रीकांत शिंदे के मंच पर यूबीटी सांसद राजाभाऊ की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी।
क्या बढ़ रही है शिंदे और उद्धव गुट की नजदीकी?
इन लगातार बैठकों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद भविष्य में शिंदे गुट का रुख कर सकते हैं। राज्य में पहले भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और पार्टी टूट के उदाहरण सामने आ चुके हैं, इसलिए इन मुलाकातों को सिर्फ “शिष्टाचार” तक सीमित नहीं माना जा रहा।
हालांकि संबंधित सांसदों और शिंदे गुट की ओर से फिलहाल किसी भी राजनीतिक बदलाव से इनकार किया गया है। नेताओं का कहना है कि ये मुलाकातें केवल विकास कार्यों और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर हुई हैं और इसका पार्टी बदलने से कोई संबंध नहीं है।
एनसीपी की बैठकों ने भी बढ़ाई हलचल
इसी बीच महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुट — शरद पवार और अजित पवार गुट — की बैठकों ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। शरद पवार ने मुंबई के वाई. बी. चव्हाण सेंटर में अहम बैठक बुलाई है, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं अजित पवार गुट की प्रस्तावित बैठक फिलहाल टाल दी गई है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर टिकी नजरें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। ऐसे में उद्धव गुट और शिंदे गुट के नेताओं के बीच बढ़ती बातचीत आने वाले दिनों में नए राजनीतिक समीकरणों की भूमिका तैयार कर सकती है।
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