हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा – गौधाम होने के बावजूद सड़कों पर क्यों घूम रहे मवेशी?
15 मई 2026 | बिलासपुर
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लाखासार गौधाम की अव्यवस्थाओं को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त सवाल पूछे। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पूछा कि यदि गौधामों में मवेशियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था है, तो फिर सड़कों पर आवारा मवेशियों की संख्या कम क्यों नहीं हो रही। सरकार की ओर से कोर्ट में जवाब प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि प्रदेश में 142 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 39 हजार मवेशियों को रखा गया है। शासन ने यह भी कहा कि गौधामों में चारा, पानी और रहने की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है तथा 205 मवेशियों को एक छोटे कमरे में ठूंसकर रखने जैसी स्थिति नहीं है।
व्यवस्था सुधारने नियुक्त होंगे नोडल अधिकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि गौधामों की निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। ये अधिकारी जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 के तहत आवारा और जब्त मवेशियों के प्रबंधन की निगरानी करेंगे।
हर महीने भेजनी होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी कि 7 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू की गई है। अब पशुपालन विभाग के संचालक को हर महीने प्रोग्रेस रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा, ताकि गौधामों में चारा, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
हाईकोर्ट ने नहीं बंद किया मामला
राज्य सरकार के जवाब के बावजूद हाईकोर्ट ने मामले को बंद करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि लगातार यह तथ्य सामने आ रहा है कि गौधाम बनने के बावजूद मवेशी सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे हैं, जिससे साफ है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होगी।
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