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एसिड अटैक पीड़ितों के लिए बड़ा कदम, राष्ट्रीय महिला आयोग ने जारी किया व्यापक एक्शन प्लान

acid attack victims

इलाज, न्याय और पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार को भेजीं सिफारिशें, ‘गोल्डन ऑवर’ से लेकर रोजगार तक फोकस

नई दिल्ली | 21 अप्रैल 2026
राष्ट्रीय महिला आयोग ने देशभर में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए बेहतर इलाज, त्वरित न्याय और प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से व्यापक सिफारिशें जारी की हैं। ये सिफारिशें गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और सामाजिक न्याय मंत्रालय को भेजी गई हैं।

‘नवजीवन’ बैठक के आधार पर तैयार रिपोर्ट
यह रोडमैप 16 जनवरी 2026 को आयोजित ‘नवजीवन: ए कंसल्टेशन ऑन केयर, जस्टिस एंड डिग्निटी फॉर एसिड अटैक सर्वाइवर्स’ बैठक के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए स्वास्थ्य, कानून, आर्थिक सहायता और सामाजिक समावेशन पर जोर दिया गया है।

इलाज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ प्रोटोकॉल की सिफारिश
आयोग ने सभी अस्पतालों में ‘गोल्डन ऑवर प्रोटोकॉल’ लागू करने, जीवनभर मुफ्त इलाज और पुनर्निर्माण सर्जरी की सुविधा देने की बात कही है। साथ ही प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग पर फोकस
रिपोर्ट में जिला और राज्य स्तर पर दीर्घकालिक काउंसलिंग सेवाएं शुरू करने और परिवार व समुदाय आधारित सहयोग तंत्र विकसित करने की सिफारिश की गई है।

तेज न्याय के लिए विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव
आयोग ने मामलों की त्वरित जांच और सुनवाई, जीरो FIR को अनिवार्य बनाने और विशेष कानूनी अधिकारियों की नियुक्ति का सुझाव दिया है। साथ ही कानूनों को और सख्त बनाने की जरूरत भी बताई गई है।

आर्थिक सहायता और मुआवजा नीति
सभी राज्यों में एक समान मुआवजा नीति लागू करने, समय पर DBT के जरिए भुगतान और गंभीर मामलों में अधिक मुआवजा देने की सिफारिश की गई है। साथ ही मासिक पेंशन और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली का भी प्रस्ताव है।

रोजगार और पुनर्वास पर जोर
आयोग ने कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया है। निजी क्षेत्र को भी पीड़ितों को रोजगार देने और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।

सामाजिक समावेशन और जागरूकता जरूरी
रिपोर्ट में भेदभाव खत्म करने, जागरूकता अभियान चलाने और पीड़ितों को नीति निर्माण में शामिल करने की सिफारिश की गई है, ताकि उन्हें समाज में समान अवसर मिल सके।

दिव्यांगता कानून में शामिल करने की मांग
आयोग ने सुझाव दिया है कि एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांगता कानून के तहत मान्यता दी जाए, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।

प्रशासनिक सुधार और समन्वय पर जोर
राज्य और जिला स्तर पर समन्वय इकाइयों की स्थापना, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और मंत्रालयों के बीच नियमित समीक्षा की जरूरत बताई गई है। साथ ही CSR फंड के उपयोग का भी सुझाव दिया गया है।

एसिड बिक्री पर कड़े नियम और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम
रोकथाम के लिए एसिड की बिक्री पर सख्त नियम लागू करने, दुकानदारों के लिए रिकॉर्ड अनिवार्य करने और एक राष्ट्रीय डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे FIR, इलाज और मुआवजे की पूरी जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके।

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