सिंगापुर अदालत का बड़ा आदेश, बायजू रवींद्रन को करना होगा सरेंडर
सिंगापुर/नई दिल्ली | 27 मई 2026
कोर्ट की अवमानना मामले में बड़ा फैसला, 70,500 डॉलर का जुर्माना भी
सिंगापुर/नई दिल्ली। भारतीय एडटेक कंपनी BYJU’S के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें कोर्ट की अवमानना मामले में 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 70,500 डॉलर का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने कहा कि रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी संपत्तियों और वित्तीय दस्तावेजों से जुड़े कई न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया, जिसके चलते यह सख्त कार्रवाई की गई।
आत्मसमर्पण और दस्तावेज जमा करने का आदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने बायजू रवींद्रन को अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने और तय जुर्माना जमा करने का आदेश दिया है।
इसके अलावा उन्हें Beer Investco Private Limited के स्वामित्व से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी पेश करने को कहा गया है। यह कंपनी एक संबंधित इकाई में हिस्सेदारी रखती है।
फिलहाल रवींद्रन कहां हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और उनकी ओर से भी इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दुनियाभर में मुकदमों का सामना कर रहे रवींद्रन
बायजू रवींद्रन पिछले कुछ समय से कई देशों में निवेशकों और कर्जदाताओं के मुकदमों का सामना कर रहे हैं।
अमेरिका में कंपनी को दिए गए 1.2 बिलियन डॉलर के लोन की वसूली के लिए कर्जदाताओं ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर रखी है। वहीं सिंगापुर में Qatar Investment Authority की सहयोगी कंपनी Qatar Holdings ने भी उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
आर्थिक संकट के दौरान हुआ था बड़ा निवेश
बताया जा रहा है कि कतर होल्डिंग्स ने उस समय BYJU’S में बड़ा निवेश किया था, जब कंपनी आर्थिक संकट से जूझ रही थी और कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही थी।
इस मामले में कतर होल्डिंग्स की ओर से मशहूर लॉ फर्म Drew & Napier ने पैरवी की, जबकि BYJU’S Investments का पक्ष Fervent Chambers ने रखा।
भारत की सबसे बड़ी एडटेक कंपनियों में थी BYJU’S
गौरतलब है कि बायजू रवींद्रन ने ‘Think & Learn Private Limited’ के नाम से कंपनी की शुरुआत की थी, जो बाद में दुनियाभर में BYJU’S ब्रांड के रूप में मशहूर हुई।
एक समय BYJU’S भारत की सबसे बड़ी एडटेक कंपनियों में गिनी जाती थी और बायजू रवींद्रन देश के चर्चित स्टार्टअप अरबपतियों में शामिल थे।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी लगातार वित्तीय संकट, कानूनी विवाद और निवेशकों के दबाव का सामना कर रही है।
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