I-PAC मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ा खुलासा: ED का दावा—50% भुगतान चेक से, बाकी कैश; हवाला कनेक्शन की जांच तेज
नई दिल्लीः 14 अप्रैल 2026
राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी के अनुसार, कंपनी करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध दिखाने में शामिल थी। इस मामले में कंपनी के डायरेक्टर और सह-संस्थापक वीनेश चंदेल को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया है।
दिल्ली पुलिस की FIR के आधार पर जांच
ईडी ने अपनी जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और फर्जी अकाउंटिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच में सामने आया कि कंपनी संगठित तरीके से अवैध धन को उत्पन्न कर उसे सिस्टम के जरिए छिपा रही थी।
50% भुगतान बैंकिंग चैनल, बाकी कैश में
ईडी के मुताबिक, I-PAC पैसे को दो हिस्सों में लेती थी—करीब 50 प्रतिशत राशि चेक या ऑनलाइन माध्यम से और शेष नकद या गैर-बैंकिंग चैनलों से। इससे काले धन को रिकॉर्ड से बाहर रखकर उसे बाद में वैध दिखाया जाता था।
फर्जी बिल और ट्रांजैक्शन का जाल
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने कई फर्जी बिल तैयार किए, ताकि विभिन्न कंपनियों से प्राप्त रकम को सही ठहराया जा सके। जबकि वास्तव में कोई सेवा प्रदान नहीं की गई थी। इन लेन-देन के जरिए पैसे को कई स्तरों पर घुमाकर अंततः वैध आय के रूप में दर्शाया गया।
हवाला नेटवर्क की भी आशंका
ईडी को इस पूरे मामले में हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल का भी शक है। जांच में संकेत मिले हैं कि नकद राशि को गैर-कानूनी चैनलों के जरिए ट्रांसफर किया गया, जिससे पैसों के असली स्रोत को छिपाया जा सके।
मुख्य भूमिका में था आरोपी
एजेंसी का दावा है कि वीनेश चंदेल कंपनी के सभी वित्तीय और संचालन संबंधी फैसलों का केंद्र था और मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया में उसकी सीधी भूमिका थी।
सबूत मिटाने के भी आरोप
ईडी ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने भ्रामक जानकारी दी और कैश ट्रांजैक्शन से इनकार किया। साथ ही, कंपनी के कर्मचारियों के अकाउंट से ईमेल और वित्तीय डेटा डिलीट करवाकर सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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