नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2026
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के प्रमुख समीर वी. कामत ने कहा है कि अग्नि-6 मिसाइल परियोजना के लिए संगठन पूरी तरह तैयार है और अब सिर्फ केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है। उन्होंने बताया कि यह अगली पीढ़ी की उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल होगी, जिसकी मारक क्षमता और तकनीकी दक्षता मौजूदा प्रणालियों से अधिक होगी। साथ ही भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम में भी तेज प्रगति हो रही है और इसके प्रारंभिक परीक्षण जल्द संभव हैं।
हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम में तेज प्रगति
डीआरडीओ प्रमुख ने बताया कि भारत दो प्रकार की हाइपरसोनिक मिसाइलों—ग्लाइड और क्रूज—पर काम कर रहा है। ग्लाइड मिसाइल को शुरुआती गति देने के बाद वह बिना इंजन के लक्ष्य की ओर बढ़ती है, जबकि क्रूज मिसाइल स्क्रैमजेट इंजन के सहारे उड़ान भरती रहती है। उन्होंने कहा कि ग्लाइड मिसाइल का विकास अधिक उन्नत चरण में है और इसके परीक्षण जल्द किए जा सकते हैं।

मजबूत पारंपरिक मिसाइल बल की तैयारी
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत एक बहु-स्तरीय पारंपरिक मिसाइल बल विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें छोटी, मध्यम और लगभग 2000 किलोमीटर तक की दूरी तय करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ क्रूज और हाइपरसोनिक प्रणालियां शामिल होंगी, जिससे विभिन्न सामरिक जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।
‘प्रलय’ मिसाइल जल्द होगी शामिल
डीआरडीओ के अनुसार ‘प्रलय’ नामक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही सेना में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ रणनीतिक मिसाइलों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग दूरी के उपयोग के लिए अनुकूलित करने पर भी काम चल रहा है।
रणनीतिक क्षमता को मिलेगी नई मजबूती
रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अग्नि-6 और हाइपरसोनिक परियोजनाएं भारत की सामरिक क्षमता को नई ऊंचाई देंगी और क्षेत्रीय संतुलन में देश की स्थिति को और मजबूत करेंगी।


