ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की नई रक्षा रणनीति, अब 50 हजार जवानों की ‘ड्रोन फोर्स’ करेगी पहला प्रहार
ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने पर भारत ने अपनी नई रक्षा रणनीति और आधुनिक सैन्य तैयारी की झलक दुनिया के सामने पेश की है। पिछले वर्ष 6 से 10 मई के बीच चले 88 घंटे के इस बड़े सैन्य अभियान ने न केवल पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाया, बल्कि भारतीय रक्षा तंत्र को आधुनिक युद्ध की नई जरूरतों के अनुरूप बदलने की दिशा भी तय कर दी।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों से सबक लेते हुए भारत अब पारंपरिक युद्ध रणनीतियों से आगे बढ़कर ड्रोन और डेटा आधारित युद्ध प्रणाली पर तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने 50 हजार जवानों की एक विशेष ‘ड्रोन फोर्स’ तैयार करने का फैसला लिया है।
जानकारी के मुताबिक, यह ड्रोन फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ यानी पहली जवाबी कार्रवाई करने वाली यूनिट के रूप में काम करेगी। इसे डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर सिस्टम का तकनीकी समर्थन मिलेगा।
इंटीग्रेटेड रक्षा मुख्यालय के अनुसार, फिलहाल 50 हजार सैन्य कर्मियों को इस नई प्रणाली के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। अगले तीन वर्षों में देशभर में 15 नए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे, जहां सिम्युलेटर और वर्चुअल रियलिटी तकनीक के जरिए रीयल-टाइम बैटल ट्रेनिंग दी जाएगी।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह नई फोर्स इंटेलिजेंस, सर्विलांस और सटीक प्रहार जैसी दोहरी भूमिका निभाएगी। इस पूरे नेटवर्क को वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड और सेना के ‘आकाशतीर’ सिस्टम का समर्थन मिलेगा।
भविष्य में बीएसएफ और आईटीबीपी जैसे सुरक्षा बलों को भी इस नेटवर्क से जोड़े जाने की योजना है। सेना की रणनीति है कि प्रत्येक कोर में लगभग 8 हजार ड्रोन शामिल किए जाएं और आने वाले समय में हर सैनिक के पास अपना व्यक्तिगत ड्रोन उपलब्ध हो।
भारतीय रक्षा तंत्र के इस बड़े बदलाव को भविष्य के हाईटेक युद्धों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
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