न्यायिक अधिकारियों पर हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बंगाल प्रशासन को फटकार; केंद्रीय बल तैनात करने के निर्देश
रायपुर, 02 अप्रैल 2026
Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल में विशेष पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले को गंभीरता से लेते हुए राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने घटना को कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए चुनाव आयोग को केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बनाया गया बंधक
घटना पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक क्षेत्र में हुई, जहां प्रदर्शन के दौरान न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक घेरकर रखा गया। जानकारी के अनुसार दोपहर से लेकर देर रात तक अधिकारियों को वहां से निकलने नहीं दिया गया और बाद में उन्हें सुरक्षित निकालते समय उनके वाहनों पर पथराव और लाठियों से हमला किया गया।
रात में देना पड़ा आपात निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश Surya Kant ने कहा कि अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें देर रात आपात निर्देश जारी करने पड़े। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि लंबे समय तक अधिकारियों को भोजन और पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
प्रशासनिक विफलता पर कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और जिला प्रशासन की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए इसे “गंभीर प्रशासनिक विफलता” बताया। अदालत ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ी।
केंद्रीय बलों की तैनाती के निर्देश
अदालत ने Election Commission of India को निर्देश दिया कि जहां-जहां न्यायिक अधिकारी कार्य कर रहे हैं, वहां पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए जाएं। साथ ही राज्य सरकार और चुनाव आयोग को न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके परिवारों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का तत्काल समाधान करने को कहा गया है।
अधिकारियों को जारी नोटिस
मामले में राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उन्हें 6 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्य में बाधा डालने और भय का माहौल बनाने की कोशिश को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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