# Tags
#अंतरराष्ट्रीय

सिंधु जल संधि रोकने का असर, पानी को तरसा पाकिस्तान का एक तिहाई हिस्सा; सिंध और बलूचिस्तान में गहराया जल संकट

Indus Water Treaty 1781338017917 m

नई दिल्ली, 13 जून 2026

भारत के सिंधु जल संधि पर सख्त रुख का असर अब पाकिस्तान में साफ दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, सिंध और बलूचिस्तान में पानी की भारी कमी से कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहा है और करोड़ों लोगों के सामने जल संकट गहराता जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। इसके कुछ महीनों बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में सिंचाई और पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। विशेष रूप से सिंध प्रांत, जहां पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची स्थित है, वहां हालात ज्यादा चिंताजनक बताए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की लगभग एक-तिहाई आबादी पानी की कमी से प्रभावित हो रही है। सिंधु नदी पर बने महत्वपूर्ण सुक्कुर बैराज से जुड़े नहर नेटवर्क में पानी का स्तर लगातार घट रहा है, जिससे खेती-किसानी पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

नहरों में पानी की भारी कमी

सूत्रों के अनुसार, नॉर्थ वेस्ट नहर में 64.1 प्रतिशत, राइस नहर में 38 प्रतिशत और दादू नहर में 82 प्रतिशत तक पानी की कमी दर्ज की गई है। इससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होने लगी है और किसानों की चिंता बढ़ गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, दादू नहर को निर्धारित 4,995 क्यूसेक के मुकाबले केवल 860 क्यूसेक पानी मिल रहा है। वहीं नॉर्थ वेस्टर्न नहर को 6,260 क्यूसेक के स्थान पर 2,100 क्यूसेक और राइस नहर को 8,700 क्यूसेक के बजाय 5,300 क्यूसेक पानी उपलब्ध हो रहा है।

पंजाब पर अधिक पानी लेने के आरोप

सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब प्रांत अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी ले रहा है। दावा किया गया है कि पंजाब को 44,000 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन उसे 53,394 क्यूसेक पानी प्राप्त हो रहा है। इससे प्रांतों के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद और तेज हो गया है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

जल संकट को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने सिंध सरकार और संघीय प्रशासन पर जल प्रबंधन में विफल रहने का आरोप लगाया है। नेताओं का कहना है कि पानी की कमी से कृषि उत्पादन, निर्यात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है।

भारत का सख्त संदेश

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्पष्ट किया था कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि भारत अपने जल संसाधनों को आतंकवाद को संरक्षण देने वालों तक नहीं पहुंचने देगा। इस बयान को भारत की रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल संकट और गहराता है तो पाकिस्तान को कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *