मत्स्य जाल से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान भर रहीं छत्तीसगढ़ की महिलाएं, सुशासन तिहार बना बदलाव का मजबूत माध्यम
25 मई 2026 | रायपुर
छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार 2026 के जरिए ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही योजनाओं का लाभ अब सीधे गांवों तक पहुंच रहा है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। विकासखंड पथरिया के ग्राम पंचायत गंगद्वारी में आयोजित समाधान शिविर में शिवशक्ति महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मत्स्य पालन के लिए मत्स्य महाजाल उपलब्ध कराया गया। समूह की सचिव मीना राजपूत ने शिविर में मछली बीज और जाल की मांग रखी थी, जिसे प्रशासन ने तुरंत स्वीकृत कर दिया। इसके बाद महिलाओं के लिए मत्स्य पालन का कार्य आसान और अधिक लाभकारी बन गया है। उत्पादन और आय में बढ़ोतरी के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।
मीना राजपूत ने कहा कि योजनाओं की असली ताकत तब दिखाई देती है जब उनका लाभ सीधे जरूरतमंद तक पहुंचता है। इसी तरह नील दिवाकर की कहानी भी महिला सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। एक समय छोटी डबरी में सीमित मछली पालन करने वाली नील दिवाकर आज “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना चुकी हैं। बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिला, जिसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन शुरू किया। आज उनकी मासिक आय 15 हजार रुपये से बढ़कर 50 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है और उनका व्यवसाय 1 एकड़ से बढ़कर 2 एकड़ तक फैल गया है। नील दिवाकर अब अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
वहीं विकासखंड लोरमी के ग्राम कारीडोंगरी में कल्याणी स्व-सहायता समूह को सुशासन तिहार के समाधान शिविर में 75 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली। समूह की सदस्य शिवकुमारी यादव ने बताया कि पहले संसाधनों की कमी के कारण व्यवसाय को आगे बढ़ाना मुश्किल होता था, लेकिन अब सरकारी सहयोग से स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। महिलाओं को अब आत्मविश्वास, सम्मान और स्थायी आय का आधार भी मिल रहा है।

सुशासन तिहार 2026 अब केवल शिकायतों के समाधान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। यही वजह है कि आज छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं सिर्फ योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। आर्थिक बदलाव के साथ-साथ सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी महिलाओं की नई पहचान मजबूत होती दिखाई दे रही है।
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