मैनपाट की नाशपाती ने बदली किसान की तकदीर: 170 पेड़ों से हर साल लाखों की कमाई, एग्री-टूरिज्म बना नई पहचान
रायपुर, 16 जुलाई 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ का शिमला कहलाने वाला मैनपाट अब एग्री-टूरिज्म (कृषि पर्यटन) का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। अनुकूल जलवायु और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के चलते यहां किसान पारंपरिक खेती छोड़कर फलोद्यान की ओर बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में ग्राम बारिमा निवासी प्रगतिशील किसान मनोज यादव ने ग्राम कुदारीडीह (मेहता पॉइंट) में नाशपाती का सफल बागान तैयार कर मिसाल कायम की है।
मनोज यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017-18 में कमलेश्वरपुर शासकीय उद्यान रोपणी से नाशपाती के पौधे लेकर 0.500 हेक्टेयर बंजर भूमि पर लगभग 200 पौधे लगाए थे। वर्तमान में उनके बागान में 170 फलदार पेड़ हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और नियमित सहयोग को दिया।
इस वर्ष ओलावृष्टि और बाजार में बिक्री प्रभावित होने के बावजूद मनोज यादव ने करीब 260 कैरेट नाशपाती का उत्पादन किया। थोक बाजार में बिक्री से लगभग 1.30 लाख रुपये और पर्यटकों को सीधे फल बेचकर 25 से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई। इस तरह उन्हें इस सीजन में लगभग 1.5 लाख रुपये की शुद्ध कमाई हुई। वहीं पिछले वर्ष अनुकूल मौसम में इसी बागान से 2.5 से 3 लाख रुपये तक का लाभ मिला था।
कुदारीडीह स्थित यह बागान अब एग्री-टूरिज्म का आकर्षण बन चुका है। यहां प्रतिदिन 100 से 250 पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटक 50 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से ताजी नाशपाती खरीदने के साथ-साथ स्वयं पेड़ों से फल तोड़ने का अनुभव भी लेते हैं। इससे किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे उपभोक्ताओं तक अपनी उपज बेचने का अवसर मिल रहा है।
मनोज यादव ने युवाओं और किसानों से अपील की है कि वे अपनी खाली पड़ी भूमि पर नाशपाती, लीची और अन्य फलदार पौधों की बागवानी अपनाकर कम रकबे में अधिक मुनाफा कमाएं। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्रों के पास फलोत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकता है।
जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग फलोद्यान विकास, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं। मनोज यादव की सफलता इस बात का प्रमाण है कि वैज्ञानिक खेती, सरकारी सहयोग और मेहनत से बागवानी को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
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